11 सितंबर का हमला जिसे अक्सर सितम्बर 11 या 9/11 कहा जाता है.11 सितम्बर 2001 को संयुक्त राज्य अमेरिका पर सबेरे, 19 अल कायदा आतंकवादियों ने चार वाणिज्यिक यात्री जेट वायुयानों का अपहरण कर लिया. अपहरणकर्ताओं ने जानबूझकर उनमें से दो विमानों को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, न्यूयॉर्क शहर के ट्विन टावर्स के साथ टकरा दिया, जिससे विमानों पर सवार सभी लोग तथा भवनों के अंदर काम करने वाले अन्य अनेक लोग भी मारे गए. दोनों भवन दो घंटे के अंदर ढह गए, पास की इमारतें नष्ट हो गईं और अन्य क्षतिग्रस्त हुईं. अपहरणकर्ताओं ने तीसरे विमान को बस वाशिंगटन डी॰सी॰ के बाहर, आर्लिंगटन, वर्जीनिया में पेंटागन में टकरा दिया. अपहरणकर्ताओं द्वारा वाशिंगटन डी॰सी॰ की ओर पुनर्निर्देशित किए गए चौथे विमान के कुछ यात्रियों एवं उड़ान चालक दल द्वारा विमान का नियंत्रण फिर से लेने के प्रयास के बाद, विमान ग्रामीण पेंसिल्वेनिया में शैंक्सविले के पास एक खेत में जा टकराया.किसी भी उड़ान से कोई भी जीवित नहीं बचा.

अमेरिकी जज ने लगाया ईरान पर आरोप 

अल जज़ीरा की खबरों के मुताबिक ईरान को 11 सितंबर 2001 के हमलों के पीड़ितों को $ 6 बिलियन से ज्यादा का भुगतान करने का आदेश दिया गया है, जिसमें 3,000 लोगों की मौत हो गई थी. एक डिफ़ॉल्ट फैसले में अमेरिकी अदालत दक्षिणी जिले के न्यायाधीश जॉर्ज बी डेनियल न्यूयॉर्क की अदालत में कहा कि “ईरान के इस्लामी गणराज्य, इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर और ईरान के इस्लामी गणराज्य के केंद्रीय बैंक” 1,000 से अधिक व्यक्तियों की मृत्यु के लिए उत्तरदायी हैं.”

उन्होंने कुल मिलाकर ईरान को हमले में मारे गए लोगों के परिवारों को कुछ “$ 12,500,000 प्रति पति / पत्नी, $ 8,500,000 प्रति बच्चे, $ 8,500,000 प्रति बच्चे, और $ 4,250,000 प्रति भाई” का भुगतान करने का आदेश दिया है.

नहीं मिले थे ईरान के खिलाफ सबूत 

मिडिल ईस्ट मॉनिटर की खबरों के अनुसार अमेरिकी अदालत ने आरोप लगाया कि ईरान हमले करने के लिए अल-कायदा के सदस्यों की प्रशिक्षण और सहायता के लिए जिम्मेदार है, हालांकि ईरान की भागीदारी की पूर्ण सीमा अस्पष्ट है.”

इस सबूत पर दिया आदेश  

हालाँकि 9/11 आयोग को इस हमले में ईरान से सम्बंधित कोई भी संकेत नहीं मिले. लेकिन 9/11 आयोग ने हमलों की ओर अग्रसर परिस्थितियों की जांच करने के लिए आदेश दिया था जिसमे भी ईरान के समर्थन का कोई सबूत नहीं मिला. ईरान के खिलाफ एक मात्र सबूत यह है की 9/11 के हमलावरों में से कुछ ने ईरान के माध्यम से अफगानिस्तान जाने के लिए सीमा पार पर पासपोर्टों के बिना यात्रा की थी.

मिडिल ईस्ट मॉनिटर की खबरों के अनुसार ईरान के खिलाफ कानूनी मामलों में 40 कानूनी दावे शामिल हैं, जो दो साल की अवधि में एकत्र हुए हैं लेकिन अमेरिकी सरकारों में प्रतिरक्षा सुरक्षा पर विदेशी सरकारों पर मुकदमा चलाने में असमर्थ हैं. यह सब 2016 में बदल गया जब आतंकवाद अधिनियम (जस्टा) के प्रायोजक के खिलाफ न्यायमूर्ति लागू की गई थी.

सऊदी अरब पर भी लगा है आरोप 

मिडिल ईस्ट मॉनिटर की खबरों के अनुसार इस साल की शुरुआत में, सऊदी अरब ने भी अमेरिकी संघीय न्यायाधीश से 9/11 के सऊदी अरब को दोषी कहने वाले मुकदमे को ख़ारिज करने के लिए कहा था, जिसमे सऊदी अरब पर इस हमले में पीड़ित लोगों के कुछ रिश्तेदारों का कहना है की “सऊदी अरब ने आतंकवादी समूह अलकायदा और इसके संस्थापक ओसामा बिन लादेन को समर्थन प्रदान किया था.”

अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने सऊदी अरब की एक बोली को ख़ारिज कर दिया, जिसमे कहा गया था की “9/11 के हमले में पीड़ितों के परिवारों की मदद करने के केस को छोड़ दिया जाए”.जिसके बाद  अमेरिकी जिला न्यायाधीश जॉर्ज डेनियल ने मैनहट्टन में 11 सितंबर के आतंकवादी हमलों में पीड़ित लोगों को कहा है की वह अब सऊदी अरब सरकार पर आरोप लगाते हुए एक मुकदमा, और नुकसान में करोड़ों डॉलर की मांग कर सकते हैं.

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