Home अरब देश तेल की गिरती कीमतों से बौखलाया सऊदी अरब, हुआ बड़ा नुकसान

तेल की गिरती कीमतों से बौखलाया सऊदी अरब, हुआ बड़ा नुकसान

सऊदी अरब वैश्विक तेल बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए, और इसी प्रकार ओपेक के सदस्यों और ग़ैर सदस्यों को तेल के उत्पादन में कमी लाने के लिए सऊदी अरब ने अपने अरबो डॉलर खर्च किए।

सऊदी सरकार के इस फैसले ने सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुचाया कुछ विशेषज्ञों ने सऊदी बजट में 100 अरब डॉलर के घाटे का आकलन किया है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी 2016 के लिए सऊदी अरब की आर्थिक विकास दर में गिरावट का अनुमान लगाया है क्योंकि 2014 से तेल की कीमतों में महत्वपूर्ण गिरावट आ रही है, तेल की बिक्री के माध्यम से अपनी 90 प्रतिशत से अधिक अर्थव्यवस्था का प्रबंध करने वाले देश सऊदी अरब को भी गंभीर आर्थिक संकट का सामना है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमान अनुसार 2015 में सऊदी अरब के बजट में घरेलू उत्पाद का 14 प्रतिशत बजट कम है जबकि आर्थिक विकास दर में 1.2 प्रतिशत की कमी आई है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अधिकारियों के अनुसार बजट में कमी इस बात का कारण है कि विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करे जोकि सऊदी अरब के विदेशी मुद्रा भंडार में गंभीर गिरावट का कारण होगा।

सऊदी अधिकारियों ने भी बजट घाटे के चलते करों को लागू कर दिया है, अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी और सरकारी एजेंसियों के निजीकरण को खत्म कर दिया है।

इसके अलावा सऊदी अरब ने तेल के 55 डॉलर प्रति बैलर होने के कारण 2017 और सैनिक बजट मे 7 प्रतिशत की कमी की है।

सऊदी अधिकारियों ने देश के इतिहास का सबसे विस्तृत बजट पेश किया ताकि नागरिकों और निवेशकों को आश्वस्त कर सकें कि आर्थिक सुधार की योजना बजट में गंभीर कटौती पर निर्भर है।

भविष्यवाणियों में कहा गया है कि यदि तेल की कीमत इतने निचले स्तर पर बनी रही तो सऊदी अरब के घरेलू उत्पाद का बजट घाटा 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।

सऊदी अरब ने बजट घाटे से निपटने के लिए सरकारी सब्सिडी को कम करत हुए पानी, बिजली और ईंधन की कीमतो में वृद्धि की है। सऊदी अरब मे इस समय पैट्रोल की कीमतो मे 40 प्रतिशत बढ़ी है।