source: Al Arabiya

द इकोनोमिस्ट की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक,  सऊदी-इराकी संबंधों में बढती नज़दीकियों से ईरान कुछ घबरा रहा है.

बसरा शहर में एक सऊदी वाणिज्य दूतावास खोलने सहित सऊदी और इराक के बीच हवाई सम्बन्धों की बहाली होगी जिसमें हर महीने 140 उदासने भारी जाएंगी. इस बात से ईरान को चिंता है कि उनके प्रभाव को अधिकारहीन दिया जाएगा.

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 2015 में इराक के साथ संबंधों को पुनर्स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई और 2017 में देश के साथ सीमाओं को फिर से खोलने में एक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

अल अरेबिया के मुताबिक, सऊदी का इरादा इराक के पुनर्निर्माण में सहायता करना है और उन्हें दाईश के गुटों से लड़ने में मदद करना है. आपको बता दें कि, सऊदी विदेश मंत्री आदिल अल-जुबैर ने पिछले महीने एक सम्मेलन में कहा था कि सऊदी ने इराक के लिए एक अरब अमरीकी डालर के लोन और एक्सपोर्ट में 500 मिलियन डॉलर देने का आश्वासन दिया है.

अर्थशास्त्री के मुताबिक, सऊदी अरब का उदेश्य निवेश के माध्यम से आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है, जो “ईरान के उत्पादों से ईराक को मुक्त करना है. इसमें कई व्यवसाय शामिल हैं, जैसे सऊदी पेट्रोकेमिकल दिग्गज साबिक, बगदाद के उद्घाटन कार्यालय, और अन्य परियोजनाएं, जो कि सऊदी निवेश के लिए बसरा की गिरावट वाले पेट्रोकेमिकल संयंत्र जैसे आरक्षित हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी प्रभाव गहराई से दक्षिणी इराक में निहित है यहाँ कुछ सड़कों का नाम ईरानी इस्लामिक क्रांति के नेताओं के नाम पर रखा गया है. उन्होंने कहा कि ईरान की सबसे बड़ी चिंता प्रतिस्पर्धा की लहर है जो सऊदी निवेश से होगा.

 

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