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ईरानी समाचार एजेंसी ने सऊदी अरब के सिर मढ़ा यमन में भेजी जा रही सहायता रोकने का आरोप

ईरानी समाचार एजेंसी के मुताबिक अरबी आक्रमणकारी गठबंधन ने सऊदी अरब के नेतृत्व मे मंगलवार को खाद्य सामाग्री लेजाने वाले तीन जहाज़ो को यमन की समुद्री सीमा मे प्रवेश करने से रोक दिया।

यमन की सबा समाचार एजेंसी के अनुसार एक समुद्री स्रोत ने बताया कि अरबी आक्रमणकारी गठबंधन ने सऊदी अरब के नेतृत्व मे मंगलवार को खाद्य सामाग्री लेजाने वाले तीन जहाजो को यमन की अलहदीदा बंदरगाह से दूर ले जाने के लिए विवश किया।

स्रोत ने यमनी नागरिको की नाकाबंदी और गठबंधन द्वारा खाद्य सहायता रोकने की निंदा की।

खाद्य सुरक्षा के बारे में संयुक्त राष्ट्र की तीन संस्थानो की अंतिम रिपोर्ट के अनुसार जून 2016 से मार्च 2017 तक यमन मे खाद्य संकट की स्थिति है।

खाद्य और कृषि संगठन (एफओ), विश्व खाद्य कार्यक्रम और बाल संरक्षण कोष (यूनिसेफ) ने रविवार को रिपोर्ट मे खाद्य सहायता के बुनयादी ढांचे और यमन की अलहदीदा बंदरगाह को हवाई हमलो या शहर में युद्ध के माध्यम से नष्ट करने की स्थिति मे गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।

जून 2016 में दिए गए आकड़ो के अनुसार मार्च 2017 तक खाद्य संकट का सामना करने वाले व्यक्तियो मे 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में आया है कि यमन के 22 प्रांतो मे से 20 प्रांतो को खाद्य संकट का गंभीर सामना कर रहे है और यमन की 75 प्रतिशत से अधिक जनता भूख से पीडित है जिसे तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है।

रिपोर्ट मे बताया गया है कि जो प्रांत सबसे अधिक प्रभावित और आपातकालीन खाद्य सुरक्षा से लहिज, ताज़, साअदा, हुज्जत, अलहदीदा और शिबवा प्रांत पीडित है और यमन के 12 प्रांत अदन, जमार, राजधानी सनआ, अब, मारिब, रीमा, अलमहवीयत, हजरामूत, अलजौफ, अलज़ाले, अलबैज़ा संकट के चरण मे है।

इसी प्रकार यमन की 60 प्रतिशत जनता को 17 मिलियन टन खाद्य सामग्री की मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता है जिसमे 10 मिलियन और 200 हजार टन संकट और 6 मिलियन और 800 हजार टन आपातकालीन स्थिति मे आवश्यकता है।

उक्त रिपोर्ट में भविष्यवाणी की गई है कि यमन की अलहदीदा बंदरगाह हवाई हमलो या भीतरी युद्ध के कारण बंदरगाह के बुनियादी ढांचे के विनाश से आधारभूत वस्तुओ और व्यापार के प्रभावनित होने की संभावना है।

रिपोर्ट में आया है कि खाद्य सामग्री मे कमी कुपोषण का कारण है और कई प्रांतो मे एब्यन, ताज़, अलहदीदा और हजरामूत को गंभीर कुपोषण का सामना है।

सऊदी अरब ने अपने सहयोगीयो के साथ 2015 से यमन की जमीनी, समुद्री और हवाई नाकाबंदी करते हुए यमन के भगोड़े राष्ट्रपति मंसूर हादी को बहाल करने के लिए यमन पर युद्ध थोप रखा है।

इस सैन्य आक्रमण में 12 हजार यमनी नागरिको की हत्या और हजारो की संख्या में घायल तथा लाखो लोगो के बेघर होने के आलावा कोई परिणाम नही निकला।