Home अरब देश अरब जेलों में बंद हैं 2000 से ज्यादा बेगुनाह भारतीय प्रवासी

अरब जेलों में बंद हैं 2000 से ज्यादा बेगुनाह भारतीय प्रवासी

विदेश राज्यमंत्री श्री वीके सिंह ने बताया है कि विदेशों में अलग-अलग जेलों में 7,615 भारतीय व्यक्ति कैद हैं. उन्होंने बताया कि इन में से सबसे ज्यादा 1,810 भारतीय सऊदी अरब की जेलों में सजा काट रहे हैं. 1,214 लोग यूएई की जेलों में बंद हैं. श्री सिंह ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार, भारत के 1.16 करोड़ नागरिक प्रवासी के रूप में दुनिया के अलग-अलग देशों में रह रहे हैं.

गत वर्ष अगस्त में एक खबर के हवाले से बताया गया था कि भारत से सऊदी अरब गए 2000 से ज्यादा लोगों को सऊदी अरब पुलिस ने वैध वीज़ा और पासपोर्ट होने के बावजूद जेद्दाह में जेलों में कैद कर रखा है. कुछ लोगों ने सऊदी अरब में भारतीय दूतावास से भी इस मामले में कोई कदम उठाने की गुहार लगाई थी.

इसके कुछ ही दिनों बाद वहां से पीड़ितों ने एक निजी भारतीय चैनल से बात करते हुए बात करते हुए एक व्हाट्सएप्प विडियो भेजकर प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री से से अपनी रिहाई का अनुरोध किया था. इन सभी भारतियों का कहना था कि जहाँ ये लोग पहले काम करते थे, वहां के मालिकों ने कई महीने से इनकी तनख्वाह नहीं दी थी तो ये लोग दूसरी जगह काम करने लगे थे. फिर एक दिन पुलिस आ कर इन सबको गिरफ्तार कर ले गयी.

वहीँ सऊदी पुलिस का कहना था कि उन पर सऊदी सरकार की तरफ से 10,000 रियाल यानि 1 लाख 80 हज़ार रुपये का ‘गरामा’ यानि जुर्माना लगाया गया है. ये जुर्माना तब लगाया जाता है जब कोई प्रवासी पहले वाली कंपनी से भाग कर बिना अपना पासपोर्ट लिए दूसरी कंपनी में जाकर काम करता है तो सरकार उसे गिरफ्तार कर जुर्माना लगा देती है. जुर्माना न देने पर प्रवासी को वापस उसके देश भेज दिया जाता है.

एक भारतीय चैनल से बात करते हुए 2 प्रवासियों ने बताया कि उन लोगों ने सऊदी अरब में भारतीय दूतावास के अधिकारियों से भी इस बारे में कई बार बात की लेकिन उन लोगों ने कोई कारवाई नहीं की. इन लोगों को जेद्दाह की जेल में 79 नंबर बैरक में रखा गया था. वहां और भी भारतीय कैदी हैं जो अलग-अलग बैरकों में बंद हैं.

इन लोगों ने वहां की जेलों में हो रही दुर्दशा भी बयान की. इन प्रवासियों ने बताया कि एक बैरक में 64 लोगों को रखने का प्रावधान है लेकिन वहां एक बैरक में 150 लोग तक भी रखे जाते हैं. इन्होने ये भी बताया कि वहां की जेलों के अधिकारियों का कहना है कि उनकी रिहाई तभी संभव है जब भारतीय दूतावास चाहेगा.