Home अरब देश सऊदी अरब के बारे में पाकिस्तानी सियासतदान का बड़ा बयान

सऊदी अरब के बारे में पाकिस्तानी सियासतदान का बड़ा बयान

पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ, रज़ा मोहम्मद रज़ा ने कहा है कि सऊदी अरब की अध्यक्षता वाले इस गठबंधन को इस्लामी नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि ईरान, इराक़, और सीरिया जैसे इस्लामी देश जो वास्तव में साम्राज्यवाद और आतंकवाद और इस्राईल से मुकाबला कर रह हैं इस गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।

पख़्तूनख़ा अवामी नेशनल पार्टी के नेता और पूर्व सीनेटर रज़ा मोहम्मद रज़ा ने पार्स टुडे के साथ साक्षात्कार में सऊदी गठबंधन और जनरल राहील शरीफ द्वारा इस गठबंधन के नेतृत्व के बारे में कहा है किः हालांकि पाकिस्तान में बड़े निर्णय सेना करती है और सऊदी गठबंधन के नेतृत्व का फ़ैसला भी सेना ने किया है लेकिन नवाज शरीफ सरकार विशेषकर स्वंय नवाज़ शरीफ़ ने इस बात का रास्ता साफ़ किया है कि सऊदी अरब राहील शरीफ़ की सेवाओं को तलब करे ताकि पाकिस्तान के प्रिय व्यक्ति (राहील शरीफ) जिसे नवाज़ शरीफ बर्दाश्त नहीं कर सकते, को देश से बाहर भेज सकें और उनकी लोकप्रियता कम कर सकें।

उन्होंने कहा: जनरल राहील शरीफ ने सेवानिवृत्ति से पहले सेना में अपने कार्यकाल को बढ़ाए जाने की मांग की थी, लेकिन नवाज शरीफ उसके विरोधी थे। इसीलिए उन्होंने राहील शरीफ़ को सऊदी पेट्रोडॉलर का सपना दिखाया, और उनके पाकिस्तान से दूर कर दिया, और अब केवल अपने निजी हितों के लिए पाकिस्तान ने अपमान के स्वीकार किया और इस गठबंधन का हिस्सा बन गया जिसका उद्देश्य आतंकवाद से लड़ाई नहीं बल्कि ईरान और हर देश से मुकाबला करना है जो सऊदी राजनीति के खिलाफ हों।

रज़ा मोहम्मद रज़ा ने ख्वाजा आसिफ और तहमीना जनजूआ के बयानों कि जिसमें कहा गया था कि “पाकिस्तान ईरान या यमन के खिलाफ़ कोई क़दम नहीं उठाएगा” कहा: यह केवल बातें हैं क्योंकि जब पाकिस्तान पहले से डॉलर पा चुका है और फ़्री तेल ले रहा है तो उसके बाद वह सऊदी अरब के आदेशों से इनकार नहीं कर सकता है।

उनके अनुसार: अब भी यमन पाकिस्तानी बलों के घेरे में है, और व्यवहारिक रूप से पाकिस्तान इस जंग में कूद चुका है और पाकिस्तान का यह क़दम इस देश की संसद के उस फ़ैसले के विरुद्ध है जिसमें प्रस्ताव पारित करके कहा गया था कि पाकिस्तान सेना यमन के युद्ध में प्रवेश नहीं करेगी।

उन्होंने कहा: चूंकि पाकिस्तान में शियों की संख्या बहुत अधिक है और वह संसद सरकार और सेना के महत्वपूर्ण पदों पर भी हैं तो संभव है इस फैसले के देश में बुरे प्रभाव पड़ें।

उन्होंने विदेश मंत्रालय के उपाध्यक्ष के इस बयान के बारे में कि “हर सेवानिवृत्त अधिकारी जहां चाहे नौकरी कर सकता है” कहा: यह सही नहीं है, क्योंकि एक विदेशी गठबंधन का राहील शरीफ़ द्वारा नेतृत्व किया जाना क़ानून के ख़िलाफ़ है, क्योंकि संविधान में है कि कोई भी रेटार्मनट अधिकारी दो साल तक नौकरी नहीं कर सकता हैं, और यह तो क्षेत्रीय गठबंधन की अध्यक्षता का मामला है, और यह सरासर संविधान के विरुद्ध है।

मोहम्मद रज़ा ने कहा है कि सऊदी अरब की अध्यक्षता वाले इस गठबंधन को इस्लामी नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि ईरान, इराक़, और सीरिया जैसे इस्लामी देश जो वास्तव में साम्राज्यवाद और आतंकवाद और इस्राईल से मुकाबला कर रह हैं इस गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।

उन्होंने कहाः क्या यह खोखला गठबंधन फिलिस्तीनियों के अधिकारों के लिए इस्राईल से लड़ने के लिए तैयार है? उत्तर स्पष्ट है, इन देशों के पास यह करने की हिम्मत नहीं है, तो स्पष्ट है कि यह इस्लामी गठबंधन नहीं है, यह गठबंधन केवल सऊदी सरकार की रक्षा के लिए है।