source-arab news

मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉमर्स एंड इन्वेस्टमेंट ने अपना अभियान जारी रखा है, जिसमे उन्होंने कहा था की “मक्का के विक्रेता पवित्र मस्जिद के काबा, मकाम इब्राहीम और अल-हरम अल-मक्की की स्मृति चिन्ह नहीं बेच पायेंगे.

मक्का में वाणिज्य और निवेश मंत्रालय की शाखा के स्रोतों के अनुसार अल-हरम के स्मृति चिन्ह और प्राचीन वस्तुओं को जब्त कर लिया गया था और इन जगहों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए उल्लंघन करने वाली दुकानों की एक सूची बनाई गई हैं. इनमें से कई केंद्रीय प्रतिष्ठानों ने अंतरराष्ट्रीय कारखानों से काबा और मक़म इब्राहिम के स्मृति चिन्ह बेचने के लिए सहयोग किया है क्योंकि यह आर्थिकी के लिए लाभदायक है.

अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि “मक्का और मदीना में प्राचीन वस्तुएं और उपहार क्षेत्र के पुरुष और महिलाओं दोनों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा और बड़े पैमाने पर उत्पादन के अवसर देता है.”

इस्लामिक न्यायशास्त्र के प्रोफेसर अली अल-तावीम ने कहा कि “काबा की प्रतिमा और पवित्र मस्जिद के फोटो को बेचने से इनकी पवित्रता का अपमान होता है और यह गलत है.

उन्होंने यह भी कहा कि “इन स्मृति चिन्हों को इन जगहों पर ईश्वर द्वारा दी गई पवित्रता और सम्मान को ध्यान में रखना चाहिए, इस तथ्य के अलावा कि उन्हें अनुचित स्थानों में रखा जा सकता है.”

अल-मोआइया प्रतिष्ठान के मालिक अब्दुल मोनीम बुखारी का मानना ​​है “कि ये प्रतिकृतियां एक स्मारिका हैं जो कई आगंतुकों को एक ऐसा लिंक देते हैं जो उन्हें इन जगहों से जोड़ती है जो उनका आदर करते हैं. बुखारी ने कहा कि “दुनिया भर के सभी पर्यटकों की तरह उमराह और हज्ज तीर्थयात्री अपने साथ कोई स्मृति चिन्ह ले जाते हैं, जो उन्हें मक्का की याद दिलाते हैं.”

उन्होंने कहा कि इन वस्तुओं के सकल घरेलू उत्पाद पर सकारात्मक आर्थिक प्रभाव है, “इन औद्योगिक उत्पादों में से कई चीन, भारत, ताइवान और पाकिस्तान जैसे कई देशों से आयात किए जाते हैं, जो मक्का के विशेष कारखानों से दूर हैं. वे उच्च गुणवत्ता और सम्मान के मानदंडों की होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि मक्का में कुछ भी अगर बेचा जा रहा है तो वह मक्का में ही बनना चाहिए उसे बाहर के देशों से नहीं मंगाना चाहिए और हज और उमराह के अर्थशास्त्र का समर्थन करना चाहिए. “विजन 2030 की पहल में से एक  2030 तक उमराह और हज श्रद्धालुओं की संख्या 30 मिलियन तक बढ़ाना शामिल है”.

 

उन्होंने कहा कि कई आर्थिक क्षेत्र इस चरण की चुनौतियों का अनुकूलन करेंगे, जिसका मतलब है कि आवास, होटल, जीवन, परिवहन, उद्योग, प्राचीन वस्तुएं और उपहारों के संदर्भ में हज और उमरा और उनकी जरूरतों की आवश्यकता जरूरी है.

न्यूज़ अरेबिया एकमात्र न्यूज़ पोर्टल है जो अरब देशों में रह रहे भारतीयों से सम्बंधित हर एक खबर आप तक पहुंचाता है इसे अधिक बेहतर बनाने के लिए डोनेट करें
डोनेशन देने से पहले इस link पर क्लिक करके पढ़ें Click Here

वर्ल्ड न्यूज़ अरेबिया का यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें :-


आज की पसंदीदा ख़बरें
Loading...

शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here