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लाखो डॉलर खर्च करने के बाद भी सऊदी अरब अपने उद्देश्य को पूरा करने में नाकाम

उल्लेखनीय हैं कि यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना, जिसमे अमेरिकी सेना भी शामिल हैं, हूथी विद्रोहियों से लड़ रही हैं. अरब की अल-अरबिया न्यूज़ के अनुसार ये हूथी विद्रोही ईरान द्वारा समर्थित हैं. हूथी विद्रोहियों को ईरान द्वारा ही बनाया गया था ताकि वो यमन में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल सके.

ज़ाहिर हैं की यमन में लगभग शिया और सुन्नी दोनों ही समुदाय बराबर हैं. यहाँ की जनता भी हटाये गए राष्ट्रपति के विपक्ष में हैं. राष्ट्रपति अब्दराब्बुह मंसूर हादी को उखाड़ फेंका. जिसके बाद यमन में 2015 मार्च से युद्ध का आगाज़ हुआ.

सऊदी अरब की रिपोर्ट पर बात करे तो उनका कहना हैं कि यमन की सरकारी सेना सऊदी अरब के साथ मिलकर हूथी विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रही हैं और राष्ट्रपति हादी को वापस सत्ता में लाने की कोशिश कर रही हैं तो वही दूसरी ओर अगर ईरानी न्यूज़ एजेंसियों के हवाले से मिली खबर के बारे में बात की जाये तो उनका कहना हैं कि यमन में सरकारी सेना सऊदी अरब के खिलाफ लड़ रही हैं और हूथी एक इस्लामिक मूवमेंट चला रहे हैं.

इसी बीच आपको बता दे कि ईरानी एजेंसी जिस मूवमेंट की बात कर रही हैं वो अंसारुल्लाह मूवमेंट हैं जो यमन में सक्रिय हैं, जो हूथी द्वारा चलायी जा रही हैं.

गौरतलब हैं कि यमन में जो गृह युद्ध जारी हैं इसमें अब तक हज़ारो लाखो येमेनी नागरिक बेवजह मारे जा चुके हैं. यमन की एक तिहाई आबादी जोकि बच्चे हैं भुखमरी के कारण मौत की कगार पर खड़े हैं. इसके बावजूद सऊदी अरब अपने उद्देश्य में कामयाब नहीं हुआ.