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सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सुधर फेल होने पर हो रही आलोचना

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अरब जगत और मिडिल ईस्ट के सबसे शक्तिशाली नेता है. बिन सलमान को क्राउन प्रिंस का पद संभाले अभी सिर्फ एक साल ज्यादा का वक़्त हुआ है, लेकिन इस साल में बिन सलमान ने सऊदी का तख्तापलट कर दिया है. सऊदी अरब में नयी नीतियों और सुधारों को लांच करने के बाद वह इंटरनेशनल मीडिया की सुर्ख़ियों में बने रहते है.

लेकन बिन सलमान के सुधार अब सऊदी की अर्थव्यवस्था को नुक्सान पहुचाने लगें है. क्योंकि सऊदी में चाहए स्कूल हो या बैंक या फिर कोई और विभाग यहाँ सऊदीयों से ज्यादा दुसरे देशों से आये प्रवासियों को काम दिया है. यानी सऊदी की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाए में “प्रवासियों” का योगदान भी बेहद अहम है. लेकिन पिछले कुछ महीनों से बिन सलमान के लोकप्रिय सुधार विज़न 2030 के तहत सऊदी के सभी विभागों से प्रवासियों कर्मचारियों को निकला जा रहा है. सिर्फ सऊदी नागरिकों को नौकरी दी जा रही है.

बिन सलमान का सऊदीकरण का सपना सऊदी के लिए घातक साबित होता जा रहा है. प्रवासियों को नौकरी से निकालने के बावाजूद सऊदी नागरिकों को नौकरी देने पर भी सऊदीयों में बेरोज़गारी स्तर कम होने की बजाए बढ़ गया है. जिसे आलोचकों ने सऊदी के लिए खतरनाक बताय है. दूसरी तरफ अगर हम सऊदी महिलाओं की बात करें तो बिन सलमान के सुधारों में सबसे ज्यादा सऊदी महिलाओं पर ध्यान केन्द्रित किया गया है लेकिन चौकाने वाली बात यह है सऊदी में सबसे ज्यादा बेरोज़गार महिलाऐं ही है, हाल ही की रिपोर्ट में सऊदी महिलाओं में बेरोज़गारी डर 75.6 % है.

एक नए शोध से पता चला है कि प्रवासी श्रमिकों का अभूतपूर्व पलायन यानी बड़ी संख्या में प्रवासियों के सऊदी छोड़ने  पर सऊदी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है और यह क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान द्वारा बनाई गई एक विवादास्पद घरेलू श्रम सशक्तिकरण पहल के खिलाफ आलोचना का स्रोत बन चुका है.

वहीँ लओचाकों का कहना है की क्राउन प्रिंस मोहमाद बिन सलमान का सऊदीकरण सुधर फेल हो गया है जिसकी वजह से सऊदी की अर्थव्यवस्था काफी प्रभावित हुयी है.