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आर्थिक मंदी के बावजूद अमेरिका से 300 अरब डॉलर के हथियार खरीदेगा सऊदी अरब

वाइट हाउस के एक अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर ये खुलासा किया है कि अमेरिका सऊदी अरब के साथ कई सौदों की एक श्रंखला को अंतिम रूप दे रहा है। अधिकारी के अनुसार इस चरण में 100 अरब डालर का समझौता किया जा रहा है जबकि दस साल के भीतर तीन सौ अरब डालर के हथियार सऊदी अरब के बेचे जाएंगे।

नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर वाइट हाउस के अधिकारी ने कहा कि वाइट हाउस चाहता है कि सऊदी अरब की सेना को मज़बूत बनाए लेकिन साथ ही इस बात को भी सुनिश्चित रखे के सामरिक शक्ति में इस्राईल का प्रभुत्व प्रभावित नहीं होगा।

ट्रम्प पहले सऊदी अरब की यात्रा करेंगे और उसके बाद इस्राईल जाएंगे। इसे विशेषज्ञ ट्रम्प सरकार की नज़र में सऊदी अरब के विशेष महत्व का चिन्ह मानते हैं। रियाज़ यात्रा में ट्रम्प थाड मिसाइल सिस्टम के बारे में बात करेंगे जो अमरीका ने दक्षिणी कोरिया में स्थापित किया है। अमरीका सऊदी अरब को बहुउद्देश्यीय वारशिप और टेक्निकल सपोर्ट भी देगा।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री आदिल अलजुबैर ने हाल ही में कहा है कि ट्रम्प प्रशासन सऊदी अरब को हथियार बेचने के संबंध में कांग्रेस की प्रक्रिया पूरी करने के क़दम उठा चुका है। अमरीका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने भी सऊदी अरब की यात्रा के दौरान कहा था कि उनका देश सऊदी अरब को मज़बूत देखना चाहता है।

टीकाकारों का कहना है कि सऊदी अरब सरकार अमरीका के हथियार ख़रीदने पर मजबूर है क्योंकि ट्रम्प ने खुलकर कह दिया है कि सऊदी अरब को बचाने के लिए अमरीका को भारी ख़र्च वहन करना पड़ रहा है। ट्रम्प सरकार सऊदी अरब पर दबाव डालकर पैसे वसूल करना चाहती है ताकि ट्रम्प चुनाव प्रचार के दौरान देश की मूल संरचनाओं में निवेश का अपना वादा इस तरह से पूरा कर सकें।

अमरीकी सरकार ने सऊदी अरब को विश्वास दिला रखा है कि जिस दिन वाशिंग्टन ने सऊदी सरकार का समर्थन बंद किया वह तत्काल गिर जाएगी और अपना अस्तित्व जारी नहीं रख पाएगी। टिप्पणीकार इसे एक प्रकार की फिरौती वसूली मान रहे हैं। सऊदी अरब इस समय भारी आर्थिक दबाव में है। तेल की क़ीमतों में भारी गिरावट से इस देश की अर्थ व्यवस्था चरमराने लगी है और बड़ी संख्या में कंपनियां बंद हो गई हैं।

दूसरी ओर सीरिया और यमन के युद्धों में भी सऊदी अरब लिप्त है और उसे भारी मात्रा में धन ख़र्च करना पड़ रहा है। यही कारण है कि सऊदी अरब का विदेशी मुद्रा भंडार बहुत तेज़ी से कम हो रहा है। इन्हीं हालात के कारण सऊदी अरब की शाही सरकार ने आर्थिक सुधार की नीति लागू की जिससे आम जनता पर भारी दबाव पड़ने लगा और लोगों में रोष फैलने लगा तो सरकार ने कुछ सुधार कार्यक्रम स्थगित कर दिए अलबत्ता इसके लिए दूसरे कारण बताए गए। एसी परिस्थितियों में भी सऊदी अरब के पास अमरीका से हथियारों की डील के अलावा कोई चारा नहीं है क्योंकि सऊदी अरब को अमरीका के ट्रम्प प्रशासन ने बुरी आतंकित कर रखा है।