Home अरब देश काबा शरीफ को नहलाने की प्रक्रिया जो हर मुस्लिम जानना चाहेगा

काबा शरीफ को नहलाने की प्रक्रिया जो हर मुस्लिम जानना चाहेगा

इस्लाम में हज का बहुत महत्त्व है. हर मुस्लिम की ख्वाहिश होती है कि वह अपने जीवन में एक बार हज करने जा सके. यूँ तो हर साल लाखों लोग हज करने जाते हैं लेकिन काबा शरीफ़ को नहलाने का दृश्य हर किसी को देखना नसीब नहीं होता. बहुत से लोग तो ये भी नहीं जानते कि काबा शरीफ को नहलाया कैसे जाता है. काबा शरीफ को हर साल आबे-जमजम से नहलाया जाता है और उस पर मुश्के ऊद का छिड़काव किया जाता है. अल्लाह के घर की सफ़ाई का तरीका नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने सहाबा (रज़ि) को बताया था और पिछले चौदह शताब्दियों से अधिक समय से ठीक उसी तरह काबतुल्लाह को नहलाया जा रहा है.

आमतौर पर सऊदी अरब के शाही परिवार के लोग ही काबा शरीफ़ को नहलाते हैं. आबे-जमजम में कपड़े भिगो कर काबा की आंतरिक दीवारों को साफ किया जाता है. फिर उसी तरह बाहरी दीवारों धोई जाती हैं. इसके लिए तय तारीख से एक दिन पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं. ज़म-ज़म के पानी में ताइफ़ के गुलाब के अर्क, ऊद और दूसरी बहुमूल्य सुगंध को मिलाया जाता है.

काबा शरीफ़ की दीवारों को तोलियों से पोंछा जाता है और मेहमानों की विदाई के बाद उसके धुले हुए संगमरमर के फर्श को ढक दिया जाता है. काबा शरीफ़ की भीतरी दीवारों पर गुलाबजल और खुशबू में भिगो कर सफेद रंग का कपड़ा फेरा जाता है. आबे-जमजम में गुलाब की खुशबू और दूसरी खुशबुओं को मिलाया जाता है और उसे फर्श पर गिरा खजूर के पत्तों से साफ किया जाता है.

आमतौर पर काबतुल्लाह को स्नान का यह सब प्रक्रिया लगभग दो घंटे में पूरी हो जाती है. काबा शरीफ़ के आंतरिक दीवारें तीन मीटर लंबी हैं. उसकी छत के अंदरूनी हिस्से को हरे रंग के रेशम से कवर किया गया है.