Home अरब देश कैसे अदा करे ईद-उल-फ़ित्र की नमाज़?

कैसे अदा करे ईद-उल-फ़ित्र की नमाज़?

ईद का त्यौहार इस्लाम धर्म एक स्पेशल मौका होता है जब लोग एक साथ इकठा होकर ईद-उल-अदहा की नमाज़ अदा करते हैं.आमतौर पर देखा जाता है कि ईद की नमाज़ अक्सर लोग सही तरीके से अदा नहीं कर पाते हैं, आइये हम आपको बताते है किस तरीके से ईद की नमाज़ अदा की जाए.

अमूमन जब भी इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने खड़े होते हैं तो इमाम के साथ सारे अरकान को अदा करते हैं, ऐसे ही हम ईद की नमाज़ में करते हैं. ईद के नमाज़ के दौरान हम तकबीर ( अल्लाह-ओ-अकबर) कई बार पढ़ते हैं जोकि दूसरी नमज से अलग होता हैं.

पहली रकअत-

पहला स्टेप– सबसे पहले नामज़ की नियत करते हैं, “नियत करता हूँ मैं 2 रकात नमाज़ ईद-उल-फ़ित्र वाजिब, में छह ज़ायेद तकबीरें के पीछे इस इमाम रुख मेरा काबा शरीफ की तरफ”

दूसरा स्टेप– इमाम के पहली बार अल्लाह-ओ-अकबर कहने के बाद दोनों हाथो उठाये, और इमाम को फॉलो करे. यह पहली तकबीर होती हैं.

तीसरा स्टेप- इसी तरह इमाम साहब तीन बार तकबीर कहेंगे और आपको उनको फॉल्व करना हैं जिसके बाद इमाम साहब क़ुरान की आयत की तिलावत करेंगे जिसको सिर्फ सुन्ना हैं,

चौथ स्टेप– क़ुरान की तिलावत के लिए इमाम साहब सूरह फातिहा की तिलावत करेंगे और इसके बाद क़ुरान की किसी दूसरी सूरह की तिलावत करेंगे. आपको पढ़ना नहीं सिर्फ सुन्ना हैं.

पांचवा स्टेप– इसके बाद अल्लाह-ओ-अकबर कहते हुए इमाम साहब रुकू में जाएंगे.

छठा स्टेप– इसके बाद इमाम साहब समी-अल्लाह-उल-इल्मन हमिदह कहते हुए रुकू से उठेंगे.

सांतवा स्टेप- इसके बाद इमाम साहब अल्लाह-ओ-अकबर कहते हुए सजदे में जायेग. दो सजदे करेंगे

दूसरी रकत

आंठवा स्टेप– इस बार इमाम साहब क़ुरआन की तिलावत के साथ रकत की शुरुआत करेंगे.

नवा स्टेप– तिलावत के बाद रुको में जाने से पहले तीन बार तकबीर, अल्लाह-ओ-अकबर, पढ़ी जाएगी और चौथी बार में अल्लाह-ओ-अकबर कहते हुए रुकू में जाया जायेगा.

दसवा स्टेप– इमाम साहब समी-अल्लाह-उल-इल्मन हमिदह कहते हुए रुकू से उठेंगे.

ग्यारहवाँ स्टेप– इसमें फिरसे दो सजदे करेंगे.

बारहवां स्टेप– दोनों सजदे पूरे करने के बाद आप तशददूद के लिए दोनों पैरो को समेत कर बैठेंगे.

तेरवह स्टेप– इसके बाद वैसा ही करेंगे जैसे आम नमाज़ पढ़ते वक़्त करते हैं.

नमाज़ के फ़ौरन बाद इमाम साहब कुतबे (स्पीच) के लिए खड़े होते हैं इसको छोडना सख्त मना हैं इस कुतबे के बिना ईद-उल-फ़ित्र की नमाज़ अधूरी रह जाती हैं.