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सऊदी अरब और इजराइल के बीच सहयोगात्मक रिश्ते बनाने को मध्यपूर्व की यात्राएं कर रहे ट्रम्प

ट्रम्प की मध्य पूर्व की यात्रा का अस्ली मकसद इस्राईल और सऊदी अरब के बीच सहयोग को बढ़ाना और क्षेत्रीय संकटों को हल करने में इन दोनों देशों की सहभागिता को बढ़ाना है।
इस्राईल में अमरीकी राजदूत डेविड फ्रेडमैन ने कहाः अमरीकी राष्ट्रपति का मानना है कि अमरीका और सऊदी अरब के बीच संबंधों की घनिष्ठता अंतरराष्ट्रीय शांति में प्रभावी भूमिका निभाएगी, और एक महान मध्य पर्व परियोजना को पूरा करने में सहायक होगी जिसमें बाराक ओबामा असफल हो गए थे, यह परियोजना मध्य पूर्व में एक व्यापक शांति लाएगी इस प्रकार कि यह मध्य पूर्व के संकटों के राजनीतिक हल का आरम्भ होगा।

इस्राईल में अमरीका के इस राजदूत ने कहाः ट्रम्प सऊदी अरब, इस्राईल और वाटिकन की यात्रा पर जाएंगे ताकि वह इस प्रकार इस्लाम, ईसाईयत और यहूदियत पर आधारित एक मजबूत गठबंधन तैयार कर सकें, और आतंकवाद, उग्रवाद और हिंसा का मुकाबला कर सकें।

उन्होंने कहाः ट्रम्प का मानना है कि अरब दुनिया के प्रमुख और लीडर होने के नाते सऊदी अरब अपनी विदेश नीति में अरब देशों के शासकों और अधिकारियों का नेतृत्व करता है, इसी प्रकार ट्रम्प का विश्वास है कि इस्राईल, वाटिकन और सऊदी अरब तीन धर्मों के केन्द्र होने के नाते सांस्कृतियों और धर्मों के बीच के आपसी सहयोग और वार्ता को बढ़ने में प्रभावी होंगे।

डेविड ने कहा ट्रम्प की मध्य पूर्व की यात्रा का अस्ली मकसद इस्राईल और सऊदी अरब के बीच सहयोग को बढ़ाना और क्षेत्रीय संकटों को हल करने में इन दोनों देशों की सहभागिता को बढ़ाना है।