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पवित्र शहर मक्का पर हुए मिसाइल हमले के बारे में हम क्या जानते हैं, पढ़िए यह पूरी रिपोर्ट

सऊदी अरब की गठबंधन वाली सेना यमन में हौथी विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रही हैं. इस लड़ाई में दोनों देशो के सीमा से सटे प्रान्त प्रभावित हैं. सऊदी अरब के जज़ान और नजरान शहर में काफी नुक्सान हुआ हैं तो वही यमन के कई प्रान्त तबाह हो चुके हैं, हज़ारो नागरिक मौत को गले लगा चुके हैं, बच्चे भुखमरी की कगार पर आ गए हैं. लोगो की ज़िन्दगी इतनी दयनीय हो गयी हैं कि अगर उनका उल्लेख किया जाये तो आँखे नाम हो जाये.

एक उदाहरण के तौर पर अगर हम समझे, अधिकतर देखने को मिलता हैं कि माँ बाप की लड़ाई में बच्चे काफी प्रभावित होते हैं कभी-कभी तो इतना अधिक असर होता था कि बच्चे आत्महत्या कर लेते हैं, ऐसे कई उदाहरण हैं. इसी तरह सऊदी अरब और यमन के विद्रोहियों के बीच चल रहे इस युद्ध में नागरिको को खामियाज़ा भुगतना पड़ रहा हैं.

हाल ही में हमलो का मुआयना किया जाये तो इस लड़ाई में हौथी विद्रोहियों ने इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र स्थल को निशाना बनाने की कोशिश लेकिन सऊदी अरब के सैनिको इस हमले को नाकाम कर दिया. हौथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का की और एक बैलेस्टिक मिसाइल प्रक्षेपित कर दिया लेकिन सऊदी अरब के गठबंधन वाली सेना ने इस मिसाइल को शहर में पहुंचने से 65 किलोमीटर की दूरी पर हवा में ही नष्ट कर दिया.

अल-अरबिया न्यूज़ के अनुसार यह मिसाइल यमन के सादा प्रान्त से मक्का शहर की ओर प्रक्षेपित किया गया था. लेकिन इस हमले में किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ था. हालाँकि इस हमले के बाद यमन ने भी इस नाकाम हमले की आलोचन की और दुनिया भर के धर्मगुरुओ और राजनेताओं ने भी इस गतिविधि का खंडन किया.

अल-अरबिया न्यूज़ के अनुसार मिस्र के सैन्य विशेषज्ञ, हिशाम अल-हलब ने हौथी विद्रोहियों द्वारा प्रक्षेपित किये गए मिसाइल के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह स्कड बैलिस्टिक मिसाइल था जिसका प्रयोग सतह से सतह पर हमले करने के लिए किया जाता हैं.

उन्होंने बताया कि इस तरह के मिसाइल को लॉन्च करने के लिए उच्च तकनीकी वाहन की आवश्यकता होती हैं. जोकि हौथी विद्रोहियों द्वारा मुमकिन नहीं हैं. अल-अरबिया न्यूज़ के अनुसार विशेषज्ञओ द्वारा डिब गयी जानकारी के अनुसार तह साफ़ ज़ाहिर होता हैं कि हमले को अंजाम देने के लिए ईरान आर्मी ने मदद की थी. मिसाइल विशेषज्ञ हलब ने बताया कि इस मिसाइल की रेंज 300 किलोमीटर से अधिक हैं.

इस हमले के बाद दुनिया भर से हौथी विद्रोहियो की आलोचना हुई.
रियाध स्थित विदेशी राजदूतों ने एक आवाज़ उठाते हुए पवित्र शहर मक्का पर हुए विफल हमले की आलोचना की. अरब न्यूज़ के अनुसार जर्मन के राजदूत ने कहा कि हम इस विफल हमले कि कड़े शब्दो में आलोचना करते हैं. उन्होंने कहा कि यमन में शांति कायम करने के लिए ज़रूरी हैं कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तावित बिल पर समीक्षा कि जाये.

फ़िनलैंड के राजदूत पक्का वोयूटिलाइनें ने कहा कि सऊदी अरब की पवित्र भूमि पर इस तरह का मिसाइल अटैक की कड़े शब्दो में निंदा करते हैं. यह किसी भी तरह से स्वीकृत नहीं हैं.

अरब न्यूज़ के मुताबिक बांग्लादेश के राजदूत गुलाम मोर्शी ने बताया कि बंगालदेश हौथी विद्रोहियों के इस हमले की कड़ी आलोचना करता हैं. यह हमला सऊदी अरब पर नहीं हैं बल्कि सिर्फ इस्लाम पर हैं.

उन्होंने बताया कि मक्का और मदीना की सुरक्षा को और मज़बूत करने के लिए बांग्लादेश अपने सैनिको को भी तैनात करेगा. इसके साथ ही गल्फ कौंसिल कॉपरपोरेशन ने भी हौथी विद्रोहियों बीके इस हमले की निदा की.

मिस्र ने भी इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि यह हमला पवित्र शहर मक्का में श्रद्धालुओं को निशाना बनाने के लिए किये गया था.

उल्लेखनीय हैं कि 27 अक्टूबर देर रात यमन के हौथी विद्रोहियों ने मुस्लिम समुदाय के सबसे पवित्र शहर मक्का को निशाना बनाते हुए मिसाइल दाग डाली लेकिन सऊदी अरब ने इस मिसाइल को निशाने पर पहुँचने से पहले ही नष्ट कर दिया.

मिसाइल को लक्ष्य पर पहुँचने से पहले ही सऊदी सेना ने नाकाम कर दिया, मक्का पहुचने से लगभग 65 किलोमीटर पहले ही इस हवा में मार गिराया गया.