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नहीं मिला फिलिस्तीनी बच्चे को इसरायली जेल में ईलाज, गवानी पड़ी आँखों की रौशनी

फिलीस्तीनी कैदी सोसाइटी ने मंगलवार को इज़राइली जेल सेवा को हिरासत में रखने के लिए ज़िम्मेदार फिलीस्तीनी युवाओं के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है. जिसे उन्होंने “चिकित्सा उपेक्षा” के रूप में वर्णित किया. उन्होंने कहा कि इजराइल की कैद में जितने भी फिलिस्तीनी बच्चे उन्ही हालत बद से बदतर है. इजराइल सैनिक बच्चों को ईलाज कराने तक की आनुमति नहीं देते है.

मिडिल ईस्ट मॉनिटर के मुताबिक, “एक गैर सरकारी संगठन, कैदी सोसाइटी, जो इजरायल द्वारा हिरासत में लिया गया फिलिस्तीनियों के अधिकारों की वकालत करता है, ने एक बयान में कहा कि, पश्चिम जेरुसलम के शायर तजेदेक अस्पताल में 18 वर्षीय हसन तमीमी की आँखों की रौशनी हमेशा के लिए खो दी है.

वर्ल्ड न्यूज़ अरेबिया को मिली जानकारी के मुताबिक, बयान में कहा गया है, “फिलिस्तीनी बच्चे को इजराइल की जेल में सही ईलाज नहीं मिला इसलिए बच्चे की आँखों की रौशनी चली गयी है.

एनजीओ के मुताबिक, इजरायल की जेल सेवा ने अपनी स्थिति के बारे में जानकारी के बावजूद – तत्काल अप्रैल की शुरुआत में गिरफ्तारी के बाद तामीमी को आवश्यक चिकित्सा देखभाल नहीं होने दी. फिलीस्तीनी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में इजरायल की जेलों में लगभग 6,400 फिलिस्तीनी कैद है.

इजराइल सैनिकों ने फिलिस्तीनी पत्रकारों को किया जख्मी 

इजरायल के कब्जे वाले गाजा पट्टी के अधिकारियों ने कल अनाडोल एजेंसी की रिपोर्ट में कहा कि, “गाजा पट्टी पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 55 पत्रकार इजरायली सैनिकों द्वारा घायल हो गए हैं.”

मिडिल ईस्ट मॉनिटर के मुताबिक, एक प्रेस बयान में कहा गया है, “फिलीस्तीनी ज़मीन में पत्रकारों के खिलाफ इजरायल के उल्लंघन की संख्या, जिनमें से 55 गाजा में हुई थी, कुल 125 तक पहुंच गई है.”

“पत्रकारों में से नौ को लाइव गोला बारूद से मारा गया, आठ पत्रकारों को विस्फोटक बुलेट से मारा गया. 17 को गैस बम सीधे उनके सामने छोड़ दिए गये, जबकि 21 अन्य स्थिति से घबराए और बेहोश हो गए.