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‘मदर ऑफ़ आल बम्स’ अटैक के बाद अलग-थलग पड़ा नांगरहार, किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं

अमरीका द्वारा अफगानिस्तान के नांगरहार प्रांत में सबसे बड़े गैर परमाणु बम हमले के बाद किसी को इस क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

वलसवाली आचिन के गांव असदखील पर हमले के बाद सेना का विशेष बल वहां नही जा सका है और राष्ट्रीय विशेष सेना बलों के कुछ जवाने के अनुसार वहां पर अब तक केवल अमरीकी सैनिकों को ही जाने की अनुमति दी गई है। 4 दिन से अमेरिकी बलों ने इस गांव को घेर रखा है और किसी को नहीं जाने दिया जा रहा है।

दूसरी ओर महमंद दर्रा, डूरंड रेखा के पास दाइश के आतंकी अभी भी मौजूद हैं और वह अफगान बलों पर रॉकेट हमले भी करते हैं, असदख़ील में जाने का एक यह रास्ता है कि इस गांव को पूरी तरह खाली करवाया जाए ताकि जाने का रास्ता बन सके।

नांगरहार पुलिस ने अभी तक इस बारे में कुछ नहीं कहा है कि अब तक इस गांव क्यों खाली नहीं करवाया जा सका है ताकि सेना बम गिरने के स्थान तक जा सकें, लेकिन नांगरहार पुलिस प्रमुख ने कहा है कि इस बार राष्ट्रीय बल आतंकवादी संगठन दाएश को दोबारा वापस आने की अनुमति नहीं देंगे।

नांगरहार पुलिस प्रमुख अब्दुल रहमान रहीमी ने कहा है यह ऑपरेशन रणनीतिक आधार पर किया जा रहा है ताकि दुश्मन पूरी तरह से निकाले जा सकें।

नांगरहार के स्थानीय अधिकारियों के अनुसार सबसे पहले सेना रास्ता खोलने की कोशिश कर रही हैं।
नांगरहार स्थानीय सलाहकार समिति के सदस्य मेहराबुद्दीन ने सरकार से मांग की है कि जो लोग विस्थापित हो गए हैं उनकी मदद की जाए ताकि वे अपने गाँव में रह सकें।

दूसरी ओर गांव के लोग दाइश के वापस आने से परेशान हैं, और उनके अत्याचारों के बारे में सोचकर भी डर जाते हैं।

हमीदुल्लाह ने कहा है कि आपने देखा है कि इन लोगों पर अत्याचार हुआ है और उनके घरों को ध्वस्त कर दिया गया है। प्रवासियों की मांग है कि सरकार उनके गांव को सुरक्षा दे ताकि वे अपने गांव में रह सकें।

गौरतलब है कि पिछले गुरुवार को अमरीका ने असद ख़ैल वलसवाली आचिन में ‘मदर ऑफ़ आल बम्स’ नाम से प्रसिद्ध बम गिराया था, जिसके बाद किसी को इस गांव में जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।