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भारत में मुस्लमानो सहित अन्य अल्पसंख्यको पर बढ़ते हमले बर्दाश्त नहीं :पाकिस्तानी अख़बार

भारत में अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे उत्पीड़न पर अमेरिका लगातार अपनी नज़रे जमाये हैं. हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने धार्मिक आज़ादी से जुड़ी 2015 की अपनी रिपोर्ट जारी की हैं.

इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में मुस्लमानो सहित अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के साथ हो रहे भेदभाव और उत्पीड़न पर चिंता व्यक्त करते हुए इसकी आलोचना की हैं. जो पाकिस्तानी मीडिया का तवज्जो का केंद्र बना हुआ हैं.

बीबीसी की न्यूज़ के मुताबिक इस रिपोर्ट के बाद पाकिस्तानी अख़बार ‘औसाफ़’ लिखता हैं कि “धार्मिक आज़ादी को लेकर विशेष अमरीकी दूत डेविड स्टेन ने भारत में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाली बर्ताव पर चिंता जताई है.”

पाकिस्तान के उर्दू मीडिया के एक और अख़बार “नवा-ए-वक़्त” लिखता है कि डेविड स्टेन ने एक सवाल के जबाव में कहा, “गौमांस हो या कोई और बहाना, मुस्लमानो सहित अल्पसंख्यकों पर हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते.”

इसके साथ ही पाकिस्तान के रोज़नामा अख़बार अपनी रिपोर्ट में “पाकिस्तान’ ने क्वेटा में हालिया हमले के लिए जहां भारतीय ख़ुफिया एजेंसी रॉ की गतिविधियों पर सवाल उठाया है, वहीं पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाये हैं.

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अख़बार कहता हैं कि “कहीं न कहीं हमारी सुरक्षा व्यवस्था में कमज़ोरी तो ज़रूर है, जिसका फ़ायदा उठाकर दहशतगर्द धमाके करने में कामयाब हो जाते हैं”

अख़बार ‘रोज़नामा’ के मुताबिक यह दौर किसी के विचारो पर रोक लगाने का नहीं हैं बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी का हैं. इस लिहाज़ से अगर भारत में देखे तो जहा पर गौरक्षा के नाम पर अल्पसंख्यको पर अत्याचार हो रहे हैं.

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अखबार का कहना हैं कि भारतीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों को भेजी अपनी एडवायज़री रिपोट में लिखा है कि गौरक्षा के नाम पर किसी भी हिंसक घटना को बर्दाश्त न करें.

इस रिपोर्ट के पर अख़बार लिखता हैं कि इसके बावजूद पिछले दो साल से मुस्लमानो के ख़िलाफ़ देश में गौरक्षक जो बर्बरियत अल्पसंख्यक समुदायों पर कर रहे हैं, उस पर मोदी इसलिए चुप थे कि मुसलमान उनका वोट बैंक नहीं हैं.

इसके बाद अख़बार कहता हैं कि जब भारत के प्रधान मंत्री को इस बात का अंदाज़ा हुआ कि अब यह मामला मुस्लमानो से बढ़कर दलितों तक पहुँच गया तब उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ी और 80 फ़ीसदी गौरक्षकों को फ़र्ज़ी बता डाला.