Home एशिया भारत ने दिखाई दरयादिली, लेकिन सबकी किस्मत ऐसी नहीं होती

भारत ने दिखाई दरयादिली, लेकिन सबकी किस्मत ऐसी नहीं होती

कहा जाता हैं परिंदे सरहद नहीं देखते उनको उड़ने के लिए तो बस आसमान चाहिए. लेकिन जब भारत और पाकिस्तान की सीमा की बात आती हैं तो शायद परिंदो को भी सोचना पड़ता होगा की सीमा पार करे या नहीं, क्योकि जब कभी पाकिस्तान की सीमा पर किसी हिंदुस्तानी को पकड़ा जाता हैं तो सीधा जासूस या आतंकी का आरोप मंड दिया जाता हैं ऐसा ही भारत में भी होता हैं जब कभी सीमा पर पाकिस्तान के लोगो को पकड़ा जाता हैं तो उनके सीधा आतंकी घोषित कर जेल में भेजने के लिए तैयारी शुरू हो जाती हैं. लेकिन जब बाद में तफ्तीश के दौरान पता चलता हैं ये बेगुनाह हैं. ऐसा ही कुछ पिछले साल भारतीय प्रशासित कश्मीर में हुआ. जिसको बीबीसी के संवादाता ने कुछ इस तरह बताया.

सितंबर में भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी में चरमपंथी हमला हुआ तो उसके तीन दिन बाद दो युवा भी गिरफ़्तार हुए जिनके बारे में भारतीय टीवी चैनल्स पर ब्रेकिंग न्यूज़ फ्लैश होनी शुरू हुई कि ये दो चरवाहे हैं जो चरमपंथियों के गाइड थे. ये भी बताया गया कि उनसे कड़ी पूछताछ हो रही है. बाद में पता चला ये लड़के तो मुज़फ़्फराबाद के एक स्कूल में मैट्रिक में पढ़ रहे थे और सैर-सपाटे के लिए निकलते-निकलते लाइन ऑफ कंट्रोल के दूसरी तरफ़ पहुंच गए और धर लिए गए. अब संकेत ये मिल रहे हैं कि इन लड़कों को निर्दोष पाया गया है और आशंका है कि उन्हें किसी भी दिन पाकिस्तान लौटा दिया जाएगा.

बीबीसी न्यूज़ के अनुसार अब से दो दिन पहले ये हुआ कि भारतीय कश्मीर की ओर से दो वर्ष पहले भटककर लाइन ऑफ कंट्रोल के इस पार आ जाने वाले गांव गुरेज के बिलाल अहमद और कुपवाड़ा के अरफाज़ यूसुफ़ को चकोटी उड़ी सेक्टर के क्रॉसिंग प्वाइंट पर पाकिस्तान के फौजियों ने तोहफों और मिठाई के साथ भारतीय अफ़सरों के हवाले किया. बिलाल का भाई जावेद और अरफाज़ के पिताजी यूसुफ़ भी उन्हें लेने पुल पर मौजूद थे.

हालाँकि कई मामलो में ऐसा भी हुआ जब निर्दोष होते हुए भी मौत का सामना करना पड़ता हैं. जब दो देश किसी मामले में एक-दूसरे पर भरोसा न करते हों तो ऐसा माहौल का सीधा सर नागरिको पर इसी तरह पड़ता हैं. मगर अच्छी बात ये है कि भारत और पाकिस्तान के दरम्यां दुश्मनी में घटाव- बढ़ाव से अलग एक तरह की अपूर्वदृष्ट समझ बढ़ती जा रही है. उदाहरण ये है कि एक-दूसरे के भटके हुओं को वापस भेजने के काम में पहले से ज्यादा तेज़ी आ रही है.