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भारत ने एक ही मिसाइल से छोड़े 104 सेटेलाइट, अमेरिका और रूस को पीछे छोड़ बना पहला देश, यहाँ पढ़े ISRO का साइकिल से मिसाइल का सफर

भारत की भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की हैं. जब बुधवार को सुबह पूरा भारत अपनी नींद से जाग रहा था तो वही ISRO एक नया इतिहास रचने की तैयारी कर रहा था. ISRO ने बुधवार को एक ही रॉकेट से 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर अंतरिक्ष विज्ञान में वो मुकाम हासिल कर लिया है जो अमेरिका, रूस, चीन जैसे विकसित देशों के वैज्ञानिकों के लिए सपना है.

ISRO की इस उपलब्धि पर दुनिया भर में इसकी चर्चा जारी हैं. भारत के लोग अपने वैज्ञानिको को बधाइयाँ दे रहे हैं. सोशल साइट्स पर लोग दिल खोलकर अपने वैज्ञानिकों की तारीफ कर रहे हैं. इस मौके पर हम आपको बताते हैं कि ISRO ने आज यहाँ तक का सफर कैसे पूरा किया.

भारत के इस रिसर्च संस्था को 15 अगस्त 1969 में डॉ. विक्रम साराभाई द्वारा स्थापित किया गया था. आसमान में जाने का ISRO का सफर साइकिल से शुरू हुआ था. एनडीटीवी न्यूज़ के अनुसार वैज्ञानिकों ने पहले रॉकेट को साइकिल पर लादकर प्रक्षेपण स्थल पर ले गए थे. इस मिशन का दूसरा रॉकेट काफी बड़ा और भारी था, जिसे बैलगाड़ी के सहारे प्रक्षेपण स्थल पर ले जाया गया था.

हैरानी की बात ये थी कि भारत ने पहले रॉकेट के लिए नारियल के पेड़ों को लांचिंग पैड बनाया था. वैज्ञानिकों के पास अपना दफ्तर नहीं था, वे कैथोलिक चर्च सेंट मैरी मुख्य कार्यालय में बैठकर सारी प्लानिंग करते थे. हालाँकि इस समय भारत में ISRO के 13 केंद्र हैं और बेंगलुरु में इसम मुख्या केंद्र हैं.

इसरो ने अपने सबसे सफल रॉकेट पीएसएलवी की मदद से 104 सैटेलाइट को प्रक्षेपित किया. इसमें 101 विदेश सैटेलाइट हैं. इनमें भारत और अमेरिका के अलावा इजरायल, हॉलैंड, यूएई, स्विट्जरलैंड और कजाकिस्तान के छोटे आकार के सैटेलाइट शामिल हैं. ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया.