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पाकिस्तान में लब्बैक “या रसूल्लाह” नामक आंदोलन, सुन्नी मुफ्तियों ने आत्मघाती हमलो के खिलाफ दिया ये फतवा

पाकिस्तान के सेहवान में स्थित सुन्नी सूफी संत लाल शाहबाज़ क़लंदर की दरगाह पर हमले के बाद सुन्नी धर्मगुरुओ ने आत्मघाती हमलो को हराम बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की हैं. प्राप्त समाचारों के अनुसार पाकिस्तान में लाल शाहबाज़ क़लंदर की दरगाह पर हुए आतंकी हमले की पूरी दुनिया में जहां निंदा की जा रही है.

जिसके विरुद्ध शनिवार को पाकिस्तान के सुन्नी मुसलमानों के धर्मगुरुओं ने एक प्रेसवार्ता के द्वारा कड़े शब्दों में निंदा करते हुए आत्मघाती हमलों को इस्लाम के विरुद्ध बताते हुए उसके हराम होने का फ़त्वा दिया है.

इसके साथ ही पाकिस्तान में हो रहे लगातार आतंकवादी हमलो से परेशान जनता एकत्र हुई जनता ने “लब्बैक या रसूल्लाह” नामक आंदोलन की घोषणा की और जनता से देश भर में आतंकवाद विरोधी निंदा दिवस मनाने की अपील की है.

शनिवार को पाकिस्तान के वरिष्ठ सुन्नी मुफ़्ती पीर अफ़ज़ल क़ादरी और शैख़ुल हदीस हाफ़िज़ ख़ादिम हुसैन रिज़वी की अध्यक्षता में एकत्रित सैकड़ों मुफ़्तियों ने आतंकवाद और आत्मघाती हमलों के ख़िलाफ़ हराम का फ़त्वा जारी कर दिया, इस फतवे में सुन्नी मुफ्तियों ने ऐसे हमलो को हदीस और कुरान की रोशननी में हराम यानि वर्जित करार दिया हैं.

मुस्लिम धर्मगुरूओं की सभा में सूफ़ी शहबाज़ क़लंदर की मज़ार पर हुए आत्मघाती हमले में मरने वालों की आत्मा के लिए प्रार्थना की गई हैं.