source: Voice Of America

यूनाइटेड नेशन ने कहा है कि पिछले साल अगस्त में सैन्य अभियानों के दौरान 655,000 लोगों को बांग्लादेश भेजा गया था, इसके बाद म्यांमार में लगभग 100 रोहिंग्या बच्चे फंसे हुए थे.

यूनाइटेड नेशन की बच्चों की एजेंसी (UNICEF) की प्रवक्ता मैरीज़ी मर्काडो ने कहा कि 2012 में हिंसा के दौरान अपने घरों से संचालित होने के बाद से म्यांमार में 60,000 से अधिक रोहिंग्या बच्चे बीमारी से जुड़े कैंप में शामिल नहीं हुए.

मर्काडो ने मंगलवार को जिनेवा में संवाददाताओं से कहा कि वह एक महीने म्यांमार के राखिने राज्य में बिताया और एक कैंप का दौरा किया जहां “कचरे के ऊपर छोटे-छोटे घर बने हुए है जो कभी भी गिर सकते है ” और चार बच्चों की बीमारी के तीन हफ्ते के अंदर ही मौत हो गयी है.

उन्होंने कहा कि, “हम रोहिंग्या और राखिने समुदायों, दोनों के बच्चों में उच्च स्तर के जहरीले डर का खतरा बना हुआ हैं,” उन्होंने यह भी कहा कि, इस खतरे में ज़्यादातर  जातीय राखिने के बच्चे शामिल है.

source: Reuters

म्यांमार के सरकारी प्रवक्ता जौ हटे ने कहा कि 2017 के आखरी छह महीनों में बांग्लादेश के लिए रोहिंग्या के प्रवास के दौरान म्यांमार में अकेले बचे हुए बच्चों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

राखिने बौद्ध और अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों के बीच दशकों से तनाव बढ़ता जा रहा है जिनके नागरिकता भी नहीं है , हालांकि कई परिवार इस क्षेत्र में पीढ़ियों से रहे हैं. 2012 में राखिने राज्य में दो गुटों की हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए थे, और 120,000 रोहिंगिया शिविरों में रहते थे.

2012 के संघर्ष के मद्देनजर, कुछ रोहिंग्या ने एक आतंकवादी समूह का आयोजन किया है, जिनमें नौ सीमा पुलिस अधिकारियों की मौत हो गयी थी.

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