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लखनऊ – मदरसों को लेकर विवादित बयान देने वाले शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज्वी बयान पर हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। शिया धर्म गुरु उनकी लगातार आलोचना कर रहे हैं और उनके बयान की निंदा कर रहे हैं। अब उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वसीम रिजवी की गिरफ्तारी की मांग की है। मौलाना कल्बे जव्वाद ने वसीम रिजवी के बयान की निंदा करते हुए कहा कि शिया समुदाय वसीम रिज्वी के बेबुनियाद बयान की निंदा करता है।

उन्होंने यूपी सरकार से सवाल किया कि आखिर सरकार द्वारा वसीम रिजवी को छूट दिए जाने का कारण किया है? अभी तक उसके खिलाफ सीबीआई जांच नहीं कराई गई और ना ही पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल की जा रही है। जबकि उसका अपराध और भ्रष्टाचार साबित हो चुका हैं।

मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे बयानों से देश का माहौल खराब हो सकता है और उत्तर प्रदेश में दंगों की स्थिति पैदा हो सकती है इसलिए इस पर सख्त कार्रावाई हो और वसीम रिज्वी को गिरफतार किया जाये। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वसीम रिज्वी के खिलाफ कड़ी कार्रावाई नहीं करते हैं तो हम लखनऊ से दिल्ली तक विरोध करने पर मजबूर होंगे।

मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने में कहा कि शिया समुदाय वसीम रिज़्वी के बयान की कड़ी निंदा करता है,उहोंने सवाल किया कि वसीम रिज़्वी को छूट दिए जाने के पीछे कारण किया है? गौरतलब है कि शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिज्वी ने पीएम मोदी को एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत के मदरसो में आतंकी शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने मांग की थी कि इन मदरसों को सीबीएसई बोर्ड से जोड़ा जाये ताकि आतंकवाद न फैले।

क्या है पर्दे के पीछे की सच्चाई

Shia Wakf Board president Waseem Rizvi in conversation with Nirmohi Akhada representative Ram Das at Naka

विवाद से हटकर पहले कुछ चेहरों को पहचान लेते है

  • सैय्यद वसीम रिजवी – शिया वक्फ बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष तथा आज़म खान से नजदीकी जगजाहिर है.
  • मोहसिन रज़ा – वर्तमान योगी सरकार में एकमात्र मुस्लिम मंत्री के नाम से मशहूर
  • कल्बे जवाद – प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु तथा शिया समुदाय में मज़बूत पकड़

चलिए कहानी को अधिक पीछे ना ले जाकर 2014 से शुरू करते है जब लखनऊ में अलविदा जुमे के दिन शियाओ पर तत्कालीन समाजवादी सरकार ने लाठीचार्ज करवाया था उस जुलूस की अगुवाई कल्बे जवाद कर रहे थे शिया वक्फ बोर्ड के चुनाव में धांधली के आरोपों के मद्देनजर आजम खान और जव्वाद के बीच चल रही तनातनी हिंसक रूप ले चुकी थी. 25 जुलाई 2014 को अलविदा की नमाज के बाद कल्बे जव्वाद की अगुआई में प्रदर्शनकारियों के हुजूम ने आजम खान के विक्रमादित्य मार्ग पर मौजूद सरकारी आवास को घेरने के लिए कूच कर दिया था. पुलिस ने उन्हें आगे बढऩे से रोकने की कोशिश की तो दोनों तरफ से छह घंटे चली हिंसक झड़प ने एक व्यक्ति की जान ले ली और सैकड़ों को घायल कर दिया.

क्यों बने वसीम रिजवी और कल्बे जवाद दुश्मन ?

शिया वक्फ संपत्तियों में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ मौलाना कल्बे जव्वाद की जंग 14 साल पहले शुरू हुई थी. वर्ष 2003 में जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने तो वक्फ मंत्री आजम खान की सिफारिश पर पूर्व सपा सांसद मुख्तार अनीस को शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया. अनीस के कार्यकाल में लखनऊ के हजरतगंज में एक वक्फ संपत्ति को बेचे जाने का मौलाना कल्बे जव्वाद ने कड़ा विरोध किया था. मौलाना के तल्ख रुख पर मुख्तार अनीस को बोर्ड के चेयरमैन पद से हटना पड़ा था.

इसके बाद 2004 में मौलाना कल्बे जव्वाद के करीबी सपा के पूर्व पार्षद वसीम रिजवी बोर्ड के चेयरमैन बने. लेकिन उसके बाद 2007 में विधानसभा चुनाव के बाद मायावती की सरकार बनने के बाद रिजवी बीएसपी में शामिल हो गए. 2009 में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया. चुनाव के बाद जब नए बोर्ड का गठन हुआ तो मौलाना कल्बे जव्वाद की सहमति से उनके बहनोई जमालुद्दीन अकबर को चेयरमैन बनाया गया और इस बोर्ड में वसीम रिजवी सदस्य चुने गए. यहीं से वसीम रिजवी और मौलाना कल्बे जव्वाद के बीच राजनैतिक जंग का आगाज भी हुआ.

वसीम रिज़वी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप 

एक साल बाद 2010 में बोर्ड पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए तत्कालीन चेयरमैन प्रो. जमालुद्दीन अकबर ने इस्तीफा दे दिया और इसके बाद वसीम रिजवी एक बार फिर शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष पद पर काबिज हुए. 2012 में सपा सरकार बनने के दो महीने बाद 28 मई को वक्फ बोर्ड को भंग कर दिया गया.

ज़ाहिरी तौर पर कल्बे जव्वाद और वसीम रिजवी दोनों आमने सामने थे अब शुरू होता है मुक़दमेबजी का दौर, इसमें मोहसिन रज़ा सामने आते है और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष पर धांधली का आरोप लगाया तथा ३६ पन्नो की एक रिपोर्ट जिसमे आज़म खान का नाम भी शामिल है जिसमे कहा गया है की तत्कालीन वक्फ मंत्री आज़म खान और शिया वक्फ बोर्ड अध्यक्ष वसीम रिजवी की भूमिका संदिग्ध है. वहीँ मोहसिन रजा के इशारे पर हजरतगंज थाने में FIR दर्ज की गई है। रिजवी के खिलाफ धारा 420, 409, 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उनपर कानपुर के स्वरुप नगर में शिया वक्फ बोर्ड की जमीन में गड़बड़ी का आरोप है।

चौतरफा घिरे वसीम रिजवी

वो कहते है ना जब मुसीबत आती है तो चारों तरफ से आती है वहीँ दूसरी तरफ मौलाना कल्बे जवाद ने भी वसीम रिजवी के खिलाफ ऍफ़आईआर दर्ज करा दी. वसीम रिजवी ने एक पत्र लिखकर मौलाना कल्बे जव्वाद पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए उन्हें आतंकवादियों तक से जोड़ का कर रख दिया था. वसीम रिजवी ने आरोप लगाया था कि मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी बाहरी शक्तियों के अनुदान द्वारा शिया युवाओं को अन्य धर्मों के खिलाफ भड़काने का काम करते है। मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी ने वसीम रिजवी के इन निराधार आरोपों के खिलाफ हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराइ थी।

अब ऐसे में जब समाजवादी सरकार जा चुकी है खुद को चारों तरफ से घिरता देखकर वसीम रिजवी के सामने अपने वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष की कुर्सी बचाए रखना बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रही है, वहीँ उनके बोर्ड के एक सदस्य बुक्कल नवाब भी पलटी मारकर भाजपा में छलांग लगा चुके है वहीँ सोने पे सुहागा यह हुआ की इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वक्फ बोर्ड को भंग करने का नोटिस चस्पा करवा दिया जिसके बाद से बोर्ड सदस्यों के हाथ पाँव फूल गये, ऐसे में अगर बोर्ड भंग होता है और उनपर पुराने मुकदमो की जांच बैठाई जाती है तो ऐसे में हलात और भी काफी मुश्किल हो जायेंगे. चारों तरफ से बुरी तरह घिर चुके शिया वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के पास अब एक ही चारा बचता है की अगर वो योगी सरकार की नज़रों में ‘अच्छे मुस्लमान‘ बन जाये तो उनकी काफी मुश्किलें दूर हो सकती है, जिसे लेकर सर्वप्रथम वसीम रिजवी ने बाबरी मस्जिद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफ नाम दाखिल करके वहां राम मंदिर बनाने की मांग की है जिसके बाद से मुस्लिम गलियारों में चर्चाओ का बाज़ार गर्म है. जिसके बाद से वसीम रिज़वी नित कुछ नया कारनामा करने में ज़रा भी संकोच नही करते, चाहे उनका मदरसे से आतंकवादी निकलने वाला हालिया ब्यान हो या राम मंदिर को लेकर पहल करने का, फिलहाल अभी तक तो अपनी कुर्सी बचाए रखने वाले वसीम रिज़वी शिया समुदाय के आँखों की किरकिरी बन चुके है अब देखना यह होगा की कुर्सी बचाए रखने की जंग में रिज़वी साहब और क्या नया शगूफा छोड़ते हैं.

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