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भारत – केरल में धर्म परिवर्तन एक बड़ा मुद्दा, सब अपनी मर्ज़ी से अपनाते हैं इस्लाम धर्म

धर्म परिवर्तन एक ऐसा काम जो किसी व्यक्ति की मौत का कारण भी बन सकता हैं, वास्तव में ये बात कुछ हद तक सही साबित होती है, जब भारत के केरल राज्य में हुई इस हत्या का अध्यन किया जाता हैं. हाल ही की बात हैं केरल के मल्लापुरम का रहने वाला और मुस्लिम धर्म में शामिल, फैसल जिसकी हत्या कर दी गयी थी.

फैसल जोकि पहले हिन्दू धर्म को मानता था लेकिन, सऊदी अरब जाने के बाद उसने इस्लाम धर्म अपना लिया, परंतु जब वो अपने शहर वापस आया तो उसकी हत्या कर दी गयी. जबकि वो अगले दिन नौकरी पर वापस सऊदी अरब लौटने वाले था.

फैसल की हत्या के आरोप में चार लोगो को गिरफ्तार किया गया हैं, जिसमे फैसल का एक करीबी रिश्तेदार भी शामिल हैं. फ़ैसल ने अपनी मौत से कुछ महीने पहले इस्लाम धर्म अपनाया था. उसका हिंदू नाम अनिल कुमार था. हाल में उन्होंने अपनी पत्नी को भी इस्लाम कुबूल कराया था. वो अपने माता-पिता को भी इस्लाम से नज़दीक लाने की कोशिश में थे.

भारतीय मीडिया की जानकारी के अनुसार पुलिस का शक हैं कि न केवल धर्म बदलना बल्कि अपने घर वालों का धर्म परिवर्तन कराना उनकी हत्या का मुख्य कारण बना. लेकिन इस बात का फैसला तो अदालत में ही होगा कि हत्या का कारण क्या हैं.

अगर बात करे धर्म परिवर्तन की तो भारत के केरल राज्य में ये एक बड़ा मुद्दा हैं. मुस्लिम समुदाय के विपक्षी संगठन इस बात का दावा करते हैं कि हिन्दू समुदाय के लोगो ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया जाता हैं. लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं हुई हैं.

राज्य में इस्लाम धर्म में परिवर्तन के लिए दो रजिस्टर्ड संस्थाएं हैं. इनमें से एक 100 साल पुरानी है जबकि कालीकट की तरबियातुल इस्लाम सभा लगभग 80 साल पहले स्थापित हुई थी.

बीबीसी न्यूज़ के अनुसार तरबियातुल इस्लाम सभा ने बीबीसी को एक ‘रेयर’ क़दम के तौर पर संस्था के अंदर आने की इजाज़त दी गयी. संस्था के मैनेजर अली कोया ने कहा कि वह आमतौर पर मीडिया को अंदर नहीं आने देते.

बीबीसी न्यूज़ के अनुसार अंदर पहुंचने के बाद देखते हैं कि एक क्लास रूम में एक मौलवी साहब 10 मर्दों को पवित्र किताब क़ुरान की एक आयत पढ़ा रहे हैं. ये सभी केरल के मुस्लिम समाज के नए सदस्य हैं.

उनमें से एक ज़िला गुंडलपेट, राज्य कर्नाटक के निवासी रफ़ीक़ चार साल पहले तक महेश थे. उन्होंने इस संस्था में आकर इस्लाम कुबूल किया. बीबीसी ने रफ़ीक़ से सवाल किया कि धर्म परिवर्तन क्यों?

Rafeeq- BBC Photo

रफ़ीक़ ने जवाब देते हुए बताया कि “मैंने क़ुरान और दूसरी इस्लामिक पुस्तकों को गहराई से पढ़ा. मुझे यक़ीन हो गया कि अल्लाह एक है जिसने हम सब को बनाया. मैंने सच का रास्ता अपना लिया.”

बीबीसी के संवादाता ने रफ़ीक़ से पुछा कि केरल में मुसलमानों के एक धड़े में कथित बढ़ी कट्टरता के बावजूद वह इस धर्म में क्यों आए? रफ़ीक़ ने कहा, “हम उस तरफ़ ध्यान नहीं देते. वैसे भी इस्लाम के बारे में ग़लत कहा जाता है.”

संवादाता ने सवाल क्या कि धर्म बदलने के लिए कोई ज़ोर-ज़बर्दस्ती, कोई मजबूरी? तो रफ़ीक़ ने साफ़ अल्फाज़ो में कहा कि उन्हें किसी ने धर्म बदलने को मजबूर नहीं किया था.”

रफ़ीक़ की ट्रेनिंग लगभग पूरी हो चुकी है. अब वे अपने माता-पिता को मुसलमान बनाने की कोशिश में लगे हैं. वो कहते हैं, “मेरे परिवार ने अब तक इस्लाम नहीं कुबूल किया है लेकिन मैंने अपने माता-पिता को इस्लाम के बारे में बताया है. इंशाल्लाह वो भी इस्लाम को अपनाएंगे.”

संस्था के प्रबंधक अली कोय का कहना हैं कि इस संस्था में धर्म परिवर्तन देश के क़ानून के दायरे में किया जाता है और हर परिवर्तन की रिपोर्ट पुलिस को भेजी जाती है.कोया कहते हैं, “लोग अपनी मर्ज़ी से इस्लाम धर्म कुबूल करते हैं.

हम पहले पहचान पत्र की जांच करते हैं. यह देखते हैं कि कहीं उनका क्रिमिनल या चरमपंथी बैकग्राउंड तो नहीं. पासपोर्ट, आधार कार्ड और स्कूल सर्टिफ़िकेट जैसे पहचान पत्र को देखकर और उनके परिवार से संपर्क करके ही उनका धर्म परिवर्तन करते हैं.”

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