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म्यांमार के रोहिंगया मुस्लमानो का कोई आसरा नहीं, मस्जिद शहीद करने के बाद अब क़ुरान पढ़ने पर भी रोक

रोहिंगया मुस्लिम शायद जिनकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं हैं. म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिम के साथ भड़ते भेदभाव और उत्पीड़न की दास्ताँ बहुत लंबी हैं.

अभी हाल ही की बात हैं जब बौद्ध समुदाय के कट्टरपंथ ने दो मस्जिदों को शहीद कर गांव के मुस्लमानो के लिए खाने पीने की सामग्री की खरीद पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद अब म्यांमार की सरकार अब मुस्लमानो पर नयी पाबन्दी लगायी हैं.

म्यांमार सरकार ने रोहिंग्या के मुस्लमानो को अपने बच्चों को धार्मिक ग्रन्थ पवित्र क़ुरान पढ़ाने पर रोक लगा दी है. धर्म की स्वतंत्रता को छीनते हुए सरकार ने मुस्लमानो पर यह बड़ा हमला किया हैं.

म्यांमार की अरकान न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक़ राखिने के मुन्ग्दाव शहर में रोहिंग्या अध्यापकों से कहा गया है कि वो इस्लामिक सिद्धांत ना बताएं और इसके लिए उनसे ज़बरदस्ती दस्तख़त करवाए गए.

यदि कोई अध्यापक इन नियमो का उलंघन करता हैं तो उसको दस साल की सजा हो सकती हैं. म्यांमार अधिकारियो ने यह निर्णय अभी मुन्ग्दाव शहर के दक्षिण में रहने वाले मुस्लमानो पर लागू किया हैं इसके कुछ वक़्त बाद यह राज्य के सभी मुस्लमानो पर लागू होगा.