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जापान ने दिया फिलिस्तीन का साथ , नहीं करेगा अपनी एम्बेसी को जेरुसलम शिफ्ट

पिछले साल अपनी तेल अवीव स्थित एम्बेसी को जेरुसलम ले जाने के ट्रम्प के फैसले के बाद ग्वाटेमाला जैसे देशों ने ट्रम्प का साथ दिया और कहा की वह अपनी एम्बेसी जेरुसलम में शिफ्ट करेंगे. ट्रम्प के फैसले के बाद हालाँकि यूएन की वोटिंग में इजराइल के पक्ष में सिर्फ 9 वोट आये थे जबकि 100 से अधिक देशों ने अपना समर्थन फिलिस्तीन के लिए दिखाया था. जिसके बाद से इजराइल जेरुसलम में एम्बेसी शिफ्ट करने के लिए कई देशों की तरफ देख रहा है. अभी कुछ दिन पहले चेक गणराज्य ने भी अपनी एम्बेसी को जेरुसलम में शिफ्ट करने के लिए मन कर दिया था तो अब जापान ने भी अपनी एम्बेसी को जेरुसलम में शिफ्ट करने के लिए मना कर दिया है.

जापान ने दिया फिलिस्तीन का साथ 

फिलिस्तीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी के मुताबिक, जापानी प्रधान मंत्री शिन्जो आबे ने मंगलवार को कहा कि “उनके देश का अपनी एम्बेसी को इज़राइल के तेल अवीव से जेरुसलम में स्थानांतरित करने की कोई योजना नहीं है.”

मिडिल ईस्ट मॉनिटर के अनुसार जापानी पीएम का यह बयान रामल्लाह में फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के साथ आबे की आधिकारिक बैठक के दौरान आया. मिडिल ईस्ट मॉनिटर की खबरों के अनुसार जापानी नेता ने दो राज्यीय समाधान के सिद्धांत और शांति प्राप्त करने के किसी भी प्रयास में योगदान देने की तैयारी के आधार पर राजनीतिक प्रक्रिया के लिए अपने देश के समर्थन की पुष्टि की और उन्होंने जापान की उन परियोजनाओं के लिए निरंतर समर्थन पर जोर दिया जो फिलिस्तीनी राज्य संस्थानों और बुनियादी ढांचे के निर्माण में योगदान देते हैं और कहा की जापान का फिलिस्तीन को हमेशा समर्थन रहेगा.

मिडिल ईस्ट मॉनिटर की खबरों के अनुसार अब्बास ने कहा कि फिलिस्तीनी पक्ष संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की जेरुसलम राजधानी के साथ स्थापना के लिए दो राज्य समाधान के सिद्धांत के आधार पर राजनीतिक प्रक्रिया के साथ आने के उद्देश्य से किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रयास की सफलता के लिए सहयोग करने के लिए तैयार था.

अंतरराष्ट्रीय परिषद का होगा गठन 

अब्बास ने इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष को हल करने के लिए 2018 के बीच में एक अंतरराष्ट्रीय परिषद बनाने के लिए भी कहा .

उन्होंने कहा की “शांति समझौते के लिए हमारे प्रस्ताव इस प्रकार हैं. यह प्रस्ताव 2018 के बीच में एक अंतरराष्ट्रीय परिषद बनाने के लिए. संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन को पूर्ण देश पहचानने के लिए, सभी एकपक्षीय उपायों को रोकने के लिए जो शांति समझौते की उपलब्धि को रोकते हैं, फिलिस्तीनियों के साथ शांति समझौते तक पहुंचने के बाद अरब शांति योजना को पहचानने के लिए. दो राज्यों के सिद्धांत को दो जून से पहले मौजूद सीमाओं के भीतर दो लोगों के सिद्धांत को अपनाने के लिए हैं.

ट्रम्प का फैसला 

पिछले दिसंबर में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देकर और वाशिंगटन के दूतावास को स्थानांतरित करने की प्रतिज्ञा करके अरब और मुस्लिम दुनिया भर में एक विरोध को आमंत्रण दिया था.