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ज़ाकिर नाइक के संगठन पर बैन लगाने का केंद्र का फैसला बिलकुल उचित: दिल्ली हाई कोर्ट

बांग्लादेश में एक रेस्टोरेंट पर हुए हमले के बाद चर्चा में आये ज़ाकिर नाइक के मुंबई स्थित एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन पर केंद्र सरकार द्वारा बैन लगा दिया गया था.

 दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को अपने एक फैसले में कहा कि ज़ाकिर नाइक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को प्रतिबंधित करने का केंद्र का फैसला बिलकुल सही था. ये फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र किया गया था. कोर्ट ने बात इस बैन को चुनौती देने वाली आईआरएफ की याचिका को खारिज करते हुए कही. केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका में ‘दम नहीं होने’ की बात कहते हुए कोर्ट ने माना कि सरकार का आदेश मनमाना और अवैध नहीं था.

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस्लामिक प्रचारक ज़ाकिर नाइक के एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की उस याचिका को सिरे से ख़ारिज कर दिया जिस में फाउंडेशन ने केंद्र सरकार के संगठन बैन करने के खिलाफ अपील की थी. इस याचिका के ज़रिये फाउंडेशन ने बैंक खातों को फ्रीज़ किये जाने के भी केंद्र के फैसले को चुनौती दी थी.

न्यायधीश संजीव सचदेवा ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार के द्वारा लिया गया ये निर्णय भारत देश की संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा की हिफाज़त के मद्देनज़र था. कोर्ट ने सरकार के इस फैसले से भी सहमति जताई कि ये आदेश पूरी तरह विचार-मंथन के पश्चात ही लिया गया था क्योंकि इस संगठन से प्रभावित होकर युवा आतंकी समूहों से जुड़ने के लिए चरमपंथी समूहों की चपेट में भी आ सकते थे.

कोर्ट ने कहा कि सरकार ने इस संगठन पर बैन को तत्काल लागू करने से सम्बंधित साक्ष्य भी कोर्ट में पेश किये हैं. सरकार ने कोर्ट को बताया कि संस्था को बैन करने के लिए ज़रूरी साक्ष्य सरकार के पास मौजूद हैं. कोर्ट ने संगठन पर तत्काल बैन के आदेश के खिलाफ दायर की गयी याचिका पर निर्णय सुरक्षित रख लिया था. केंद्र सरकार ने अदालत के सामने वे फाइलें और तमाम साक्ष्य भी पेश किये जिनके आधार पर संगठन को बैन करने का फैसला लिया गया था.

केंद्रीय गृह मंत्रालय की नवम्बर 2016 की अधिसूचना को चुनौती देने वाली आईआरएफ की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये बातें कहीं. इस अधिसूचना के ज़रिये गैर-कानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत आईआरएफ पर 5 साल का बैन लगाया गया है.