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बुधवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के लन्दन पहुँचने पर क्राउन प्रिंस का ब्रिटिश अधिकारीयों और मंत्रीमंडल द्वारा भव्य स्वागत किया गया.

क्राउन प्रिंस ने महारानी एलिजाबेथ के साथ दोपहर के भोजन में हिस्सा लिया, क्योंकि दोनों देश लंबे समय तक रक्षा संबंधों को एक दूरगामी साझेदारी में चौड़ा करने की तलाश कर रहे हैं. इसके बाद बिन सलमान ने प्रधान मंत्री थेरेसा मे के साथ भी मुलाकात की, दोनों देशों की मुलाकात से उम्मीद की जा रही थी की सऊदी अरब ब्रिटेन का एक विश्वसनीय साथी बन सकता है क्योंकि ब्रिटेन यूरोपीय संघ छोड़ने के बाद मतदान के बाद नए रिश्तों को बनाने की कोशिश कर रहा है. क्राउन प्रिंस मोहम्मद का एयरपोर्ट पर स्वागत ब्रिटिश विदेश सचिव बोरिस जॉनसन द्वारा किया गया.

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, जिन्होंने विज़न 2030 के तहत सऊदी अरब में किंग सलमान के साथ मिलकर कई अहम्रा फैसले लिए हैं और जून 2017 के बाद सऊदी अरब में भ्रष्टाचार पर कार्यवाही की, जिसमे सऊदी अरब के कई बड़े-बड़े राजकुमारों और अरबपतियों को हिरासत में लिया गया था, ब्रिटेन की यात्रा के कुछ समय बाद क्राउन प्रिंस अमेरिका का दौरा करेंगे.

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थेरेसा के डाउनिंग स्ट्रीट कार्यालयों के अंदर दोनों नेताओं ने “यूके-सऊदी सामरिक भागीदारी परिषद” का शुभारंभ किया, इस काउंसिल का शुभारम्भ सऊदी अरब के आर्थिक सुधारों को प्रोत्साहित करने और शिक्षा और संस्कृति जैसे मुद्दों पर सहयोग करने के लिए किया गया.

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थेरेसा मे के प्रवक्ता ने कहा की “दोनों देशों के यह द्विपक्षीय सम्बन्ध एक नए युग में प्रवेश करेगी, जो एक साझेदारी पर केंद्रित है जो की दोनों देशों को एक व्यापक सम्बन्ध प्रदान करता है.”

सौजन्य से-अल अरेबिया

क्राउन प्रिंस मोहम्मद ने कहा कि दोनों देशों ने ऐतिहासिक संबंधों का आनंद लिया है, यह संबंध पिछले 100  सालों से चले आ रहे है.  द डेली टेलीग्राफ अख़बार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “हमारे पास एक समान हित है जो कई सालों से दोनों देशों के रिश्तों को मज़बूट करता आया है. साथ ही उन्होंने कहा कि “ब्रिटेन के साथ हमारा रिश्ता बेहद खास है.”

उन्होंने कहा की  “ब्रिटिश और सऊदी लोग, बाकी दुनिया के साथ, अधिक सुरक्षित होंगे यदि आपके पास सऊदी अरब के साथ एक मजबूत संबंध है.”

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उन्होंने कहा था “उग्रवाद और आतंकवादी अपने एजेंडे के प्रसार के माध्यम से जुड़े हुए हैं”, ब्रिटेन और सऊदी अरब को अब कट्टरपंथ को खत्म कर मॉडरेट इस्लाम को बढ़ावा देने के लिए काम करना होगा.”

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