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मात्र एक सफ़र के बदले यौन दासता स्वीकार करने को मजबूर ये शरणार्थी बच्चे

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के डॉक्टर वसिलिया दिगिदिकी और प्रोफेसर जैकलीन भाभा की एक नयी रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी यूरोप पहुँचने की कोशिश कर रहे ग्रीस के बाल शरणार्थी यात्रा के बदले तस्करों को अपनी देह तक बेचने को मजबूर किये जा रहे हैं.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के 2 प्रोफेसर और डॉक्टर की टीम की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि ग्रीस देश के शरणार्थी छोटे छोटे बच्चे भी यौन उत्पीडन से अछूते नहीं हैं. उत्तरी यूरोप पहुँचने की चाह में इन बच्चों के पास और कोई विकल्प नहीं है. तस्कर इन बच्चों से इस यात्रा की कीमत मांगते हैं, जिसके लिए इनके पास धन नहीं होता. 16 डॉलर या 15 यूरो के बदले ये बच्चे तस्करों को अपना शरीर बेचने को मजबूर हैं. तस्कर एक यार्ता की कीमत 16 डॉलर मांगते हैं जो इन बच्चोंब पर नहीं होते, उसके बदले इन्हें यौन दास के रूप में कुछ दिन उन तस्करों के साथ गुज़ारने पड़ते हैं. यात्रा पूरी होने के बाद तस्कर इन बच्चों को औरों का शिकार बनने के लिए छोड़ देते हैं.

2015 से ग्रीस से पलायन करने वालों की संख्या 1.2 मिलियन हुई है, जिसमें 480,000 बच्चे शामिल हैं. इन में से लगभग 21,300 बच्चे ग्रीस में फंसे हुए हैं. इन में भी 2,300 बच्चे अकेले हैं. इन बच्चों की विशेष शिविरों और केन्द्रों तक पहुँच नहीं हैं जहाँ ये सुरक्षित रह सकें. इसी कारण इन बच्चों के शोषण और इन पर बढ़ते खतरे में लगातार वृद्धि हो रही है.

ये आवश्यक है कि राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निकाय बच्चों पर मंडराते इस बड़े खतरे को देखते हुए प्रवासियों की सबसे कमजोर आबादी के प्रति अपने दृष्टिकोण पर एक बार फिर से विचार करें और इनकी सुरक्षा में कोई कदम उठाएं.