Home यूरोप यह है यूरोप की पहली इको-फ्रेंडली मस्जिद

यह है यूरोप की पहली इको-फ्रेंडली मस्जिद

सौजन्य से -अरब न्यूज

हरा रंग इस्लाम का रंग है और यह रंग पर्यावरण के अनुकूल भी है जो की जिन्दगी को शांति और सुकून देता है. इसी के तहत एक ऐसी बिल्डिंग कैंब्रिज में बनायीं जा रही है हो की अभी अंडर कंस्ट्रक्शन वर्क में है और यह यूरोप की पहली इको-मस्जिद होगी.

सभी धर्मों के लोगों का किया जायेगा स्वागत 

इस परियोजना को बनाने में आर्किटेक्ट्स और इंजीनियरों की सरलता का परीक्षण किया गया है, यह मस्जिद ना सिर्फ प्रार्थना के लिए होगी बल्कि यह सभी धर्मों के लोगों के लिए है और सभी धर्मों के लोगों के लिए ज्ञान प्राप्त करने के लिए है.’

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के इस्लामिक स्टडीज के लेक्चरर टीम विंटर ने कहा की “यह सभी समुदाय के लोगों के लिए है यह सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए नहीं हैं यहाँ सभी धर्मों का स्वागत किया जायेगा.”

विंटर ने चालीस साल पहले इस्लाम कुबूला था और जिसने अपने अरबी नाम अब्देल हाकिम मुराद रखा, अब्देल ने सऊदी अरब और मिस्र में पढ़ाई की है और वह  टीम ने तीन बार हज भी किया है. टीम की नौकरी इस्लामिक अध्ययन के बारे में बताना है.

सौजन्य से -अरब न्यूज

2011 की अंतिम जनगणना के अनुसार “कैम्ब्रिज मुस्लिमों के लिए एक जगह में पूजा करने के लिए लंबे समय से अतिदेय है.”

अरब न्यूज के अनुसार कैंब्रिज 8000 मुसलमानों का घर है लेकिन यह आंकड़ा दो विश्वविद्यालयों (कैम्ब्रिज और एंग्लिया रस्किन) और 50 भाषा महाविद्यालयों में “नए मुसलमानों” की बढ़ती संख्या में विदेशी छात्रों को ध्यान में लेने में विफल रहता है.

कैम्ब्रिज में पांच मस्जिद हैं, लेकिन सभी बहुत छोटे हैं, आराधना करने वालों ने जगह-जगह किराये के मकान लिए हैं , इसलिए दस साल पहले विंटर ने कैम्ब्रिज मस्जिद ट्रस्ट की स्थापना की, जो की एक ऐसी मस्जिद का निर्माण करने के लिए बनाया गया जिसमे सभी लोग नमाज पढ़ सके.

इस्लाम में है पर्यावरण महत्वपूर्ण 

इस मस्जिद को ग्रीन नेचर का विचार भी विंटर का था, क्योंकि पर्यावरण की देखभाल इस्लाम में महत्वपूर्ण है.” विंटर ने कहा की यह कुरान में कहा गया है कि अल्लाह ने विश्वासियों को धरती संरक्षक बनाया और इसलिए पर्यावरण को इस नीति के अनुसार इस्लाम में महत्वपूर्ण दिया गया है.

इस इको मस्जिद में 1000 लोग एक साथ नमाज पढ़ सकते हैं और इस मस्जिद के अंदर एक काम्प्लेक्स होगा जिसमे रेस्तरां भी खोला जायेगा, एक अध्ययन कक्ष और शादी के लिए एक कमरा (हॉल) भी होगा.

सौजन्य से -अरब न्यूज

पूरे शहर में विभिन्न छोटी-सी जगहों पर भीड़-फोड़ करने के कई सालों के बाद, बढ़ते मुस्लिम समुदाय ने फैसला किया कि यह कार्रवाई करने का समय है. 2008 तक बस यह संभव हुआ था की मस्जिद का निर्माण करना है लेकिन फिर जितनी जल्दी संभव हो उतनी जल्दी एक मस्जिद का निर्माण करने के बजाय, यह तय हुआ कि मस्जिद पर्यावरण स्थिरता सिद्धांतों का पालन करेगा.

विंटर्स ने यह भी कहा कि वे यूरोप की पहली इको-फ्रेंडली मस्जिद में मुस्लिमों को अपने पर्यावरण संबंधी जिम्मेदारियों को उठाने के लिए प्रोत्साहित करने का इरादा रखते हैं.

उन्होंने कहा की “यह भी आशा है कि इस तरह की पहल से मिडिल ईस्ट में मुसलमानों को पर्यावरण में सक्रिय रुचि लेने और घर और मस्जिद में मूल्यवान संसाधनों को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित होगा.”

आर्किटेक्ट मार्क्स बारफ़ील्ड ने किया है डिज़ाइन

उन्होंने कहा की इसका डिज़ाइन पुरस्कार विजेता आर्किटेक्ट मार्क्स बारफ़ील्ड द्वारा तैयार किया गया, जो लंदन आई और केव ट्रिट्प वॉकवे जैसी परियोजनाओं के आर्किटेक्ट हैं.

कट्टरपंथ के लिए नहीं है कोई जगह 

विंटर ने कहा की “1950 और 1960 के दशक में मुख्य रूप से बांग्लादेश और पाकिस्तान से मुसलमान आ रहे थे लेकिन आज, तुर्क, कुर्द, अल्जीरिया और कजाकिस्तान के साथ-साथ “नए मुस्लिम” भी हैं.

मै चाहता हूँ की सभी लोग प्रेम से रहें 

विंटर 57, कैंब्रिज मुस्लिम कॉलेज के संस्थापक हैं, जो ब्रिटिश-जन्में इमामों को प्रशिक्षित करते हैं .विंटर एक व्यापक सम्मानित विद्वान, वह अक्सर रॉयल इस्लामी स्ट्रैटेजिक स्टडीज सेंटर द्वारा प्रकाशित 500 सबसे प्रभावशाली मुसलमानों की सूची में शामिल है.

उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि यह एक ऐसा स्थान हो जो की लोगों को आपस में एक साथ लाये, यह सिर्फ केम्ब्रिज के मुस्लिमों के लिए नहीं बल्कि यह सभी के लिए है. ” यह सभी समुदाय को एक रखने का स्थान है.”

 विंटर ने कहा की “सुन्नियों और शिया नई मस्जिद में एक साथ पूजा करेंगे, इमाम को सावधानीपूर्वक चुना जाएगा “यहां सांप्रदायिकता या कट्टरवाद के लिए कोई स्थान नहीं है.”