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तो पहले ही घंटे में मौत की नींद सो जाएंगे 17 हज़ार इस्राईली

इजराइल में अमोनिया कड़े भंडारों का मुद्दा अब राजनैतिक हो चला है. अप्रैल की शुरुआत में इस्राईली अदालत ने ये आदेश दिया कि इस्राईली सरकार 45 दिन के भीतर अमोनिया भंडार को ख़ाली करने की कोई सशक्त योजना पेश करे. माना जाता है कि यह भंडार हैफ़ा शहर और निकट के क्षेत्रों में रहने वालों के लिए गंभीर ख़तरा है.  इसके बावजूद इस्राईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने आदेश दिया कि यह भण्डार खाली करने या हटाये जाने के लिए कम से कम 60 दिनों का वक़्त मिलना चाहिए.

इस्राईली सूत्रों का कहना है कि यदि यह भंडार हटा दिया गया तो सैकड़ों लोग बेरोज़गार हो जाएंगे लेकिन वहीं कुछ और सूत्रों का यह कहना है कि अमोनिया उत्पादक युनिट के मालिक के बेंजामिन नेतान्याहू से करीबी सम्बन्ध हैं.

सूत्रों का कहना है कि हिज़्बुल्लाह लेबनान के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने वर्ष 2016 में अपने भाषण में हैफ़ा के निकट स्थित अमोनिया भंडार का उल्लेख किया जिसके बाद से स्थानीय लोगों में यह भय व्याप्त है कि युद्ध की स्थिति में हिज़्बुल्लाह इस भंडार को अपने मिसाइल हमले का निशाना बना सकता है जिसमें 15 हज़ार टन गैस रखी हुई है.  यदि हिज़्बुल्लाह की मिसाइल निशाने पर लगी तो हज़ारों लोग मारे जाएंगे. सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में कहा कि यह भंडार परमाणु बम बन गया है और इस तरह देखा जाए तो लेबनान के पास इस समय परमाणु बम मौजूद है क्योंकि जैसे ही कोई मिसाइल इस भंडार पर गिरेगा यह भंडार परमाणु बम का काम करेगा.

इस्राईली सूत्रों का कहना है कि नेतनयाहू ने अमोनिया भंडार ख़ाली करने के अदालत के फ़ैसले को टाल कर स्थानीय लोगों में रोष पैदा होने का अवसर दिया है। देयर इज़ फ़्युचर नामक पार्टी के नेता याईर लबीद ने कहा कि विशेषज्ञों ने यह अनुमान लगाया है कि यदि अमोनिया गैस के भंडार को कोई नुक़सान पहुंचा तो पहले ही घंटे में 17 हज़ार इस्राईली मर जाएंगे, जबकि इसके बाद भी दसियों हज़ार लोग मारे जाएंगे.

इस्राईली संसद नेसेट के सदस्य अमीर पेरिज़ ने कहा कि नेतनयाहू की ओर से अदालती आदेश की अवमानना और दस लाख से अधिक आबादी की आशाओं की उपेक्षा प्रधानमंत्री पद के लिए उनकी योग्यता पर सवालिया निशान लगाती है. एक अन्य सांसद कसनाया सब्तेलोवा ने कहा कि सैयद हसन नसरुल्लाह की धमकी बिल्कुल साफ़ है जो कह रहे हैं कि अमोनिया का भंडार संभावित परमाणु बम है. प्रधानमंत्री नेतान्याहू दस लाख से अधिक लोगों के जीवन को कोई महत्व नहीं देते.