Home मिडिल ईस्ट मोसुल की जीत का ताज अपने सिर बाँधने की कोशिश में अमेरिका

मोसुल की जीत का ताज अपने सिर बाँधने की कोशिश में अमेरिका

इराक़ी सेना और स्वंयसेवी बल हश्द अलशाबी की पश्चिमी मूसिल में बिजती की तेज़ी से बढ़ते क़दमों ने स्वंयभू ख़ेलाफ़त की समाप्ति की घंटी बजा दी है, लेकिन क्षेत्रीय राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अमरीका सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त दाइशियों के विरुद्ध इराक़ी जनता के बलिदान और उनकी विजय को अपने नाम पर समाप्त करना चाहता है और वह ख़ुद को इराक़ को दाइश के काले आतंक से बचाने वाले हीरो को तौर पर दिखाना चाहता है।

इस मक़सद के लिए अमरीका और उसको सहयोगी देश मोसुल के पुराने क्षेत्रों से न निकल पाने वाले आम नागरिको को निशाना बनाकर, हैदर अल एबादी की सरकार को लोगों की नज़र में मोसुल शहर के लोगों को जानबूझ कर निशाना बनाने वाला और उनसे बदला लेने वाला दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, और इस प्रकार मोसुल में स्वंयसेवी बलों द्वारा मिलने वाली जीत का क्रेडिट अपने नाम कर सकने का रास्ता खोल सकें।

अमरीका में ट्रम्प की नई सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमरीकी की गिरती राजनीतिक स्थिति को बचाने के लिए इराक़ में एक जीत की तलाश में है जिसको अमरीकी वोटरों के सामने एक कामयाबी के तौर पर दिखाया जा सके, लेकिन सच्चाई यह है कि मोसुल जीत के अस्ली विजेता तेहरान-बग़दाद-दमिश्क़ है क्योंकि प्रतिरोधी बलों की स्थिति इस समय युद्ध के मैदान में अच्छी है और ऐसा नहीं लगता है कि केवल अमरीकी गठबंधन विमानों की उपस्थिति सैन्य परिस्थितियों पर कोई विशेष प्रभाव डाल सकेंगे इसलिए व्हाइट हाउस ने ईरान को घेरने के लिए अपनी किस्मत दोबारा आज़माने को कोशिश कर रहा है लेकिन इस बार पूर्वी सीरिया में। पेंटागन के रणनीतिकार एक तीर से दो शिकार करना चाहते हैं, पश्चिम उन्मुख कुर्द जिनको सीरियन डेमेक्रेटिक बल (SDF) कहा जाता है के माध्यम से दाइश की राजधानी रक़्क़ा पर क़ब्ज़ा करे और इस प्रकार भौगोलिक स्तर पर प्रतिरोधी बलों को मिलाने वाली लाइट काट दे, और इसी के साथ ही कट्टरपंथी आतंकवादियों को सीरिया की राजधानी दमिश्क़ की तरफ़ भगा दे ताकि वह वहां बशार असद की सरकार के लिए सुरक्षा की चुनौतियां खड़ी करके सरकार को अस्थिर और कमज़ोर कर दे।

स्पष्ट है कि तुर्की में नाकाम तख़्तापलट की कोशिश के बाद से वहां की आंतरिक स्थिति गंभीर है, और अमरीका को पता है कि उसको अपनी साम्राज्यवादी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अब वह केवल तुर्की के सामरिक हवाई अड्डे अनजरलीक तक ही सीमित नहीं रह सकता है इसीलिए उसने मोसुल से साठ किलोमीटर दूर सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अलक़यारह छावनी, अलअंबार में ऐनुल असद, हसका में रमीलान हवाई अड्डा, और संभवता बहुत जल्द अलतबक़ा एयरपोर्ट पर क़ब्ज़ा करके वह अपने लिए इराक़ और सीरिया की सीमा पर नए ठिकाने की तलाश में है।

जो बात विश्वास के साथ कही जा सकती है वह यह है कि अमरीका मोसुल युद्ध का विजेता नहीं होगा, लेकिन अमरीका की राजनीतिक और सैन्य गतिविधियों से जो दिख रहा है वह यह है कि वह पूर्वी एशिया में एक और साज़िश रच रहा है।