Home मिडिल ईस्ट इजराइल ने अफ्रीकन प्रवासियों को देश से निकालने के दिए आदेश

इजराइल ने अफ्रीकन प्रवासियों को देश से निकालने के दिए आदेश

source: BBC

इजरायल के गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि इजरायल के अधिकारियों ने रविवार को अफ्रीका में आश्रय की तलाश करने वाले लोगों को निर्वासन नोटिस भेजना शुरू कर दिया है. इस नोटिस में कहा गया है कि शरणार्थियों को इजरायल छोड़ने के लिए 2 महीने तक वक़्त दिया गया है वरना उन्हें जेल का सामना करना पड़ सकता है.

इस योजना की अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों और इजरायली NGO ने जमकर आलोचना की है. उन्होंने कहा कि ज्यादातर सूडानी और एरिट्रिन प्रवासियों को देश से  निकालने का फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करना है और इस फैसले से अफ्रीकन प्रवासियों को नुकसान पहुंचेगा. यह योजना सिर्फ उन पुरुषों पर लागू होगी जिनके बच्चे नहीं है.

इजरायली सरकार आश्रय ढूँढने वालों को आर्थिक आप्रवासियों के रूप में देखती है और इनके लिए “घुसपैठ” शब्द का इस्तेमाल करती है.

योजना के मुताबिक, अर्फिकन शरणार्थी जो अपनी मर्जी से देश छोड़ना चाहते है उन्हें 3,500 डॉलर और एक अज्ञात तीसरे देश के लिए हवाई जहाज का टिकट दिया जाएगा. अश्रित बच्चों महिलाओं, बच्चों और पिता को निर्वासन योजना से बाहर रखा गया है.

अप्रैल से निर्वासन योजना शुरू कर दी जाएगी $ 3,500 बाटना भी धीरे-धीरे कम हो जाएगा और जो लोग देश छोड़ने के लिए राज़ी नहीं होंगे उन्हें गिरफ्तार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. कई शरणार्थियों ने कहा है कि वह अफ्रीका लौटने के बजाए दिराफ्तर होना पसंद करेंगे.

“इजराइल आयरलैंड में बंद करेगा अपनी दूतावास”

आयरलैंड के साथ इजरायल के बिगड़ते संबंध अब और भी ज्यादा ख़राब हो रहे है क्योंकि इजराइल डबलिन में अपनी दूतावास को बंद कर रहा है.

इज़राइल के सूत्रों ने बताया कि डबलिन दूतावास, एक लागत-कटौती योजना के हिस्से के रूप में, विदेश मामलों के मंत्रालय द्वारा बंद किए जाने वाले सात दूतावासों और दूतावासों की सूची पर एकमात्र पश्चिमी यूरोपीय अभियान है.

बंद होने वाले दूतावासों पर फैसला करने के लिए मंत्रालय बातचीत कर रहा है. एक समिति भी तैयार की गयी है जो इस महीने के आखिर तक ज़रूरी दस्तावेज़ जमा कर देंगे.

source: Middle East Monitor

यह व्यापक रूप से संदेह है कि नेतन्याहू सरकार विश्व स्तर पर अपनी प्राथमिकताओं को दुबारा से पेश करेंगे. अफ्रीका महाद्वीप के रूप में मान्यता प्राप्त है, जो राजनयिक गतियों के लिए सबसे ज़्यादा संभावना है. यूनाइटेड नेशन में इजरायल की हार के बाद राइट-विंग नेस्सेट को कहा गया था की वह उन राज्यों को दंडित करे जिन्होंने ट्रम्प येरुशलम को इजराइल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के खिलाफ मतदान किया था.

इज़राइली सरकार ने इस साल की शुरुआत में सात देशों में राजनयिक मिशन को बंद करने का फैसला लिया है. येरुशलम पोस्ट के मुताबिक, नई योजना के तहत अगले 3 वर्षों में दूतावास बंद हो जाएंगे, जिनमें से तीन इसी साल बंद होंगी और उसके बाद अगले दो सालों में दो और दूतावास बंद कर दी जाएगी.

येरुशलम पोस्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने नए कार्यालय खोलने की बात कही थी, खासकर अफ्रीका में. उन्होंने नवंबर में नैरोबी में एक बैठक में रवंडन के राष्ट्रपति पॉल कागामे को बताया कि जल्द ही भविष्य में इजराइल किगाली में दूतावास खुलवाएगा. रवंडन उन 35 देशों में से एक था. जिन्होंने पिछले साल दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र के मतदान के दौरान मतदान नहीं किया था.

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