source: Al Arabiya

इस्राईली सांसद एवं इस्राईली लेबर पार्टी के पूर्व नेता इसाक हेरज़ोग ने कहा है कि यरूशलम (बैतुल मुक़द्दस) के मुद्दे पर सऊदी अरब महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हेरज़ोग का कहना था कि सऊदी अरब को मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों के प्रबंधन का अनुभव है, इसलिए मेरा मानना है उसे बैतुल मुक़द्दस के बारे में बड़ी ज़िम्मेदारी दी जानी चाहिए।

सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान की प्रशंसा करते हुए इस्राईली नेता ने कहा, तथाकथित शांति प्रक्रिया में सऊदी अरब को ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए।

ग़ौरतलब है कि सऊदी युवराज एवं रक्षा मंत्री मोहम्मद बिन सलमान इस्राईल के साथ संबंध सामान्य बनाने के सबसे बड़े समर्थकों में से हैं।

बिन सलमान ने इस्राईली अधिकारियों को ईरान के ख़िलाफ़ गठजोड़ का प्रस्ताव दिया था।

हालांकि कहा जा रहा है कि इस्राईली नेता के इस सुझाव का उद्देश्य, जॉर्डन को निशाना बनाना है, इसलिए कि जॉर्डन ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के यरूशलम (बैतुल मुक़द्दस) को इस्राईल की राजधानी घोषित करने के क़दम का कड़ा विरोध किया था।

जॉर्डन के शासक शताब्दियों से बैतुल मुक़द्दस में स्थित मस्जिदुल अक़सा और ईसाई पवित्र स्थलों के मुतवल्ली या सेवक रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा में बैतुल मुक़द्दस पर वाशिंगटन के फ़ैसले के ख़िलाफ़ मतदान करने वाले 128 देशों में जॉर्डन भी शामिल था।

पिछले महीने अमरीका के इस क़दम के ख़िलाफ़ जॉर्डन नरेश किंग अब्दुल्लाह के फ़ैसले का समर्थन करते हुए इस देश के प्रधान मंत्री और अन्य सांसदों ने ऐसे बिल्ले या बैज लगाए थे, जिसमें किंग अब्दुल्लाह की तस्वीर थी और उसके नीचे अरबी में लिखा हुआ था, प्रथम क़िबले और तीसरे पवित्र स्थल के संरक्षक।

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