इस्राईली सैनिकों ने एक बार फिर मुसलमानों के पहले क़िब्ले मस्जिदुल अक़्सा पर हमला कर दिया है। ज़ायोनी शासन के सैनिकों ने मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे लोगों के साथ मारपीट की और एक महिला सहित पांच लोगों को गिरफ़्तार कर लिया।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, मस्जिदुल अक़्सा की प्रबंधन कमेटी का कहना है कि, इस्राईली सैनिकों ने मस्जिद के तमाम द्वार बंद करके नमाज़ियों पर अचनाक हमला कर दिया। इस्राईली सैनिकों द्वारा मस्जिद पर हुए अचनाक हमले से अफ़रा-तफ़री की स्थिति पैदा हो गई। इस बीच ज़ायोनी शासन के सैनिकों ने मस्जिद में नमाज़ अदा कर रहे नमाज़ियों पर अंधाधुंध लाठियां और रबर की गोलिया बरसानी शुरू कर दी, जिसके कारण कई नमाज़ी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस्राईली सैनिकों ने मस्जिद पर हमले के समय वहां मौजूद एक महिला और चार अन्य लोगों को गिरफ़्तार भी किया है। अभी यह नहीं मालूम हो सका है कि मस्जिद से गिरफ़्तार किए गए नमाज़ियों को इस्राईली सैनिक कहां लेकर गए हैं। मस्जिदुल अक़्सा की प्रबंधन कमेटी के मुताबिक़, इस्राईली सेना ने मस्जिद के पड़ोस में रह रहे एक फ़िलिस्तीनी परिवार को उनको अपने ही घर से बाहर निकालने के लिए इस हमले को अंजाम दिया है।

उल्लेखनीय है कि “अबू असब” का परिवार 65 वर्षों से मस्जिदुल अक़्सा के पहलू में रह रहा है। इस बीच ज़ायोनी शासन के अधिकारी अबू असब के घर को अपनी यहूदीकरण की उस परियोजना के ख़िलाफ़ मानते हैं जिसके अनुसार मस्जिदुल अक़्सा के पास केवल यहूदी बस्तियां होंगी और किसी भी मुसलमान को वहां रहने का अधिकार नहीं होगा।

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