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मिस्र में तस्वीरों के ज़रिये दिखाई गयी महिलाओं के ‘चुप’ रह कर उत्पीडन झेलने की कहानी

मिस्र के समाज में महिलाओं का उत्पीडन किस तरह से होता है, और उन्हें क्या सहन करना पड़ता है, इसे दर्शाने की कोशिश की है एक फोटोग्राफर ने. इस फोटोशूट में किसी महिला के यौन उत्पीडन पर समाज की चुप्पी पर ऊँगली उठाई गयी है.

‘आपकी चुप्पी ही आपका उत्पीडन है’ नाम के इस अभियान में उन अवसरों को फोटोशूट के ज़रिये दर्शाया गया है जिनमें महिलाओं का यौन उत्पीडन होता है और वे इसका विरोध करने की बजाय चुप रहती हैं.

शनिवार को फेसबुक पर पोस्ट की गयी इस एल्बम के बारे में लिखा गया है कि आपके कपडे या आपका शरीर कहीं से दिखना इसका कारण नहीं है, इस समाज में आपका अस्तित्व होना भी इसका कारण नहीं है, आपके उत्पीडन का कारण आपकी चुप्पी है. आपका चुप रहना ही आपका उत्पीडन है.

जब इस प्रोजेक्ट के टीम फोटोग्राफर मारवा राघेब से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि इस अभियान और इस फोटोशूट का एकमात्र मकसद यौन उत्पीडन के प्रति समाज की चुप्पी को लक्षित करना है, इस अभियान के ज़रिये हम समाज से पूछना चाहते हैं कि आखिर कब तक महिलाओं के यौन उत्पीडन के लिए उन्हें ही ज़िम्मेदार ठहराया जायेगा.

उन्होंने आगे कहा कि सभी तरह के उत्पीडन के लिए महिलाओं को ही दोषी ठहराया जाता है. यहाँ तक कि अगर वे अपने बचाव की कोशिश भी करती हैं तो भी उन्हें ही दोषी माना जाता है. रघेब और उनकी टीम, जिसमें अभिनेता, अभिनेत्री और निर्देशक भी शामिल हैं, महिलाओं की समस्याओं से निपटने वाले प्रोजेक्ट्स में काफी दिलचस्पी रखते हैं. उन्होंने पिछले साल भी महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा पर भी एक प्रोजेक्ट में साथ में काम किया.

इन तस्वीरों में दिखाया गया है कि बाज़ार में, काम पर, और कितनी ही बार तो सार्वजनिक परिवहन में भी सभ्य कपडे और हिजाब पहनी हुई महिलाओं के साथ भी अभद्रता या यौन उत्पीडन होता है. इन तस्वीरों में सिर से पाँव तक ढकी हुई एक लड़की अपने साथ हुए उत्पीडन के लिए, उसका देर से घर आना और क्या पहनना उचित है, जैसी बातों के चलते निराशा में अपना हिजाब हटा रही है. इन तस्वीरों में वो लड़की अपने सिर से हिजाब को थोडा सा हटा रही है ये जानने के लिए आखिर उसे अपने आस पास के लोगों को खुश करने के लिए करना क्या चाहिए.

एक और तस्वीर में दिखाया गया है कि अपने पुरुष साथी के साथ चलती हुई महिला भी सुरक्षित नहीं है, उसके पीछे बहुत से पुरुष उसे घूर रहे हैं. एक और तस्वीर में दिखाया गया है कि महिला भले ही काबिल हो, लेकिन उसके ‘महिला’ होने का अर्थ हलकी आवाज़ और उसका कमज़ोर होना ही होता है. एक तस्वीर में महिला के उत्पीडन को देखने वाले प्रत्यक्षदर्शियों को अपना मुंह टेप से बंद करे दिखाया गया है. इसका अर्थ ये है कि अगर लोग महिला का उत्पीडन होते देखते भी हैं तो वो कुछ बोलना नहीं चाहते, वो इसे अनदेखा करते हैं और चुप रह जाते हैं.

महिलाओं को तो सदा ही उनकी आवाज़ कम रखने की याद दिलाई जाती है, लेकिन उसकी सुरक्षा में खड़े होकर बोलने वाले पुरुष कहीं नज़र नहीं आते. रघेब ने बताया कि इन तस्वीरों को ‘सामान्य’ प्रतिक्रिया मिली, जबकि कई लोगों ने इसे अति प्रतिक्रियात्मक बताया. बहुत से लोगों ने इस पर कहा कि ऐसा अक्सर ही होता है.