इस्राइल के एक आर्कियोलॉजिकल विशेषज्ञ ने अल-जज़ीरा न्यूज़ को बताया हैं कि अल-अक्सा मस्जिद परिसर के पश्चिमी दीवार और एक प्राचीन यहूदी मंदिर के बीच कोई सम्बन्ध नहीं हैं. यह सूचना इस्राइल के दावे को कमज़ोर करने के लिए एक महत्वपूर्ण तथ्य हैं.

आर्कियोलॉजिकल विशेषज्ञ मेयर बेन-डोव, जोकि जेरुसलम और यहूदी मंदिर पर लिखी गयी कई किताबो के लेखक हैं, ने कहा हैं कि मस्जिद-अल-अक़्सा की पक्षिमी दीवार का यहूदी धर्म में कोई महत्व नहीं हैं.

इससे पहले यूनेस्को द्वारा भी इस बात को साफ़ कर दिया गया हैं कि मस्जिद-अल-अक़्सा और पक्षिमी दीवार के मामले में इस्राइल के दावे बेबुनियाद हैं. न्यूज़ एजेंसियों के मुताबिक यह दीवार मुसलमानो के लिए “बुराक़ दीवार” हैं.

इस्राइली अख़बार हारेत्ज़ ने अपने लेख में लिखा हैं कि, “इस्राइल ने मस्जिद-अल-अक़्सा के प्रस्ताव को पारित होने से रोकने के लिए कई संभव प्रयास किये. लेकिन कुछ सदस्यो की रज़ामंदी हासिल कर पाया.”

इस प्रस्ताव को 56 देशो के सम्मुख रखा गया जिसमे 24 देशो ने फलस्तीन के मुसलमानो के पक्ष में समर्थन दिया जबकि 26 देशो ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. इस प्रस्ताव पर मिस्र ,फिलिस्तीन, क़तर, लेबनान, सूडान, मोरक्को और अल्जेरिया जैसे देशो ने अपना समर्थन दिया साथ ही यूरोप के भी कई देशो ने इसके पक्ष में वोटिंग की. जबकि अमेरिका जैसे देशो न इस प्रस्ताव का खंडन किया.

उल्लेखनीय हैं कि यहूदी बहुल इस्राइल जो हमेशा से ही मुस्लिम समुदाय के सबसे पवित्र स्थलों में से एक मस्जिद-अल-अक़्सा पर अपना कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा हैं. जिसके चलते हैं वह फलस्तीन के मुसलमानो पर अत्याचार करता आया हैं.

Web-Title: There is no relation between Masjid-al-aqsa and Jewish faith

Key-Words: Jewish Faith, Masjid-Al-aqsa, Israel, Muslim, archaeologist

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