ट्रम्प ने मंगलवार तड़के अपने ट्वीट में लिखाः “ईरान के ख़िलाफ़ आधिकारिक रूप से पाबंदी लग गयी है। ये अब तक की सबसे ज़्यादा पीड़ादायक पाबंदी होगी और नवंबर में दूसरे स्तर की पाबंदियां लगायी जाएंगी।”

अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने ट्वीट में यह भी कहाः “जो भी ईरान के साथ व्यापार करेगा वह अमरीका के साथ व्यापार नहीं कर सकता।”

समझा जाता है कि ट्रम्प की इस चेतावनी का लक्ष्य सीधे तौर पर योरोपीय संघ है जिसने ऐसा क़ानून लागू किया है जिसमें अमरीकी पाबंदियों या कोर्ट के आदेश का पालन करने से कंपनियों को मना किया गया है और इन कंपनियों को नुक़सान होने की स्थिति में हर्जाना देने का प्रावधान भी इस क़ानून में रखा गया है।

उधर ब्रितानी उपविदेश मंत्री एलिस्टर बर्ट ने कहा है कि योरोप अमरीका की नई पाबंदियों से अपनी कंपनियों की रक्षा कर सकता है। योरोप ने अपनी कंपनियों को किसी भी नुक़सान से बचाने के लिए क़ानून लागू किया है।

 

बर्ट ने बीबीसी रेडियो से इंटरव्यू में कहाः “अगर कोई कंपनी अमरीकी पाबंदियों के कारण किसी संगठन की ओर से क़ानूनी कार्यवाही की ज़द पर आती है तो योरोपीय संघ का क़ानून उसकी रक्षा करेगा।”

योरोपीय संघ के इस क़ानून के तहत योरोपीय कंपनियां अमरीकी सरकार के ख़िलाफ़ योरोपीय संघ के सदस्य देशों की राष्ट्रीय अदालत में मुक़द्दमा कर सकती हैं।

अगर कोई योरोपीय कंपनी अमरीकी पाबंदियों की वजह से ईरान के साथ व्यापार से निकलना चाहती है तो उसे क़ानूनी इजाज़त लेनी होगी और जो कंपनी ऐसा नहीं करेगी उसके ख़िलाफ़ उसके देश की सरकार कार्यवाही करेगी।

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