Home मिडिल ईस्ट सऊदी-अमेरिका का “सहयोग” मिडिल ईस्ट के लिए “बड़ा खतरा” : ईरान

सऊदी-अमेरिका का “सहयोग” मिडिल ईस्ट के लिए “बड़ा खतरा” : ईरान

ईरान ने आज कहा कि सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सहयोग मध्य पूर्व को अस्थिर कर देगा. रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वाशिंगटन के प्रभाव को सीमित करने के दबाव के बावजूद तेहरान इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति जारी रखेगा.

मिडिल ईस्ट मॉनिटर के मुताबिक,सऊदी के दौरे पर आये अमेरिका के विदेश मंत्री ने किंग सलमान से मुलाक़ात की. अमेरिका सचिव माइक पोम्पो ने कल कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका मिडिल ईस्ट में ईरान की “अस्थिरता और घातक गतिविधियों” से गहराई से चिंतित है.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बहराम कासमी ने ईरानी राज्य टीवी ने कहा कि, “ईरान के बारे में पोम्पो की टिप्पणी निराधार और दोहराई जा रही है … जब तक क्षेत्रीय देशों की वैध सरकारों को हमारी मदद की ज़रूरत है, ईरान उन देशों में अपनी उपस्थिति बनाये रखेगा.”

वहीँ सऊदी विदेश मंत्री ने कहा, “हम ईरान की तरफ ट्रम्प की नीति का समर्थन करते हैं, खासतौर पर परमाणु समझौते के संबंध में हम अमेरिका के साथ है.”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, अल-ज़ुबैर ने कहा, “बैलिस्टिक मिसाइलों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन के लिए ईरान को प्रतिबंध लगाकर दंडित किया जाना चाहिए.”

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने सऊदी अरब पर यमन के तेहरान समर्थित हौथी विद्रोहियों द्वारा मिसाइल हमलों की निंदा करते हुए रियाद में संवाददाताओं से कहा, “इस प्रशासन ने ईरान के मिसाइल कार्यक्रमों को संबोधित करने की प्राथमिकता दी है.”

पोम्पेओ के साथ यात्रा करने वाले अमेरिकी अधिकारियों ने संवाददाताओं से कहा कि ईरान द्वारा मिसाइलों की आपूर्ति की जा रही है. उन्होंने कहा, “ईरान मिसाइलों की आपूर्ति करता है और हौथी सऊदी अरब हमले करते है. लेकिन अरब गठबंधन बलों ने हौथियों की चाल कभी कामयाब होने नहीं दी है.