Home मिडिल ईस्ट नेतन्याहू ने ईरान में जल संकट की सहायता का किया दावा

नेतन्याहू ने ईरान में जल संकट की सहायता का किया दावा

नेतान्याहू ने हाल ही में एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि, इस्राईल ईरान की जनता का समर्थन करता है, और यही कारण है कि में चाहता हूँ कि अनगिनत ईरानी लोगों को बचाने में सहायता कर सकूँ।

ज़ायोनी प्रधानमंत्री ने ईरान के मौसम विभाग के आंकड़ों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा, कि लगभग ईरान के 96 प्रतिशत भाग सूखे की मार झेल रहा है।

उन्होंने ईरान के पर्यावरण मंत्री ईसा कलानतरी की बयान की तरफ़ इशारा किया जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के पाँच करोड़ लोग पर्यावरण समस्याओं के कारण अपने घरों को छोड़ने पर विवश हो जाएंगे।

इस संबंध में उन्होंने कहा कि उन्होंने एक फारसी में वेबसाइट शुरू की है जो ईरानी जनता को बताएगी की किस प्रकार पानी को दोबारा उपयोग लायक बनाया जा सके, और इस प्रकार किसानों को समझाया जाएगा कि किस प्रकार वह अपनी खेती को बचा सकें।

नेतन्याहू ऐसी स्थिति में अपने आप को ईरानी जनता का समर्थक दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि जब ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या में मोसाद का हाथ रहा है।

इस्राईली प्रधान मंत्री ने एक लॉबी तैयार करके और बहुत पैसा खर्च करके ईरान के विरुद्ध अत्याचार पूर्ण प्रतिबंध लगवाए हैं।

ईरान से नेत्नयाहू की दुश्मनी का हलिया उदाहरण ज़ायोनी प्रधानमंत्री की यूरोप यात्रा है जिसमें उन्होने ईरान पर प्रतिबंध लगाने के लिए ब्रलिन, पेरिस और लंदन की यात्रा की और वहां जर्मनी की चांसलर मार्केल, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रान, और ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे से मुलाकात की है।

उन्होने अपनी कैबिनेट में अपनी यूरोप यात्रा की उपलब्धियों के बारे में बोलते हुए कहा, ईरान की उपस्थिति हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा है।

जहां एक तरफ़ इस्राईल ईरान के जल संकट की सहायता की बात कर रहा है वहीं, उससे कुछ ही दूरी पर गाज़ा पट्टी में लोग ज़ायोनी शासन की पूर्ण नाकेबंदी झेल रहे हैं, और संयुक्त राष्ट्र के अनुसार गाज़ा पट्टी, खाद्य पदार्थ, दवा और पीने के स्वच्छ पानी का संकट है।

लगातार होने वाली बमबारी गाज़ा पट्टी के जल नेटवर्क को और ध्वस्त कर रही है, और इसी के साथ ही नगरपालिका के कई जल विशेषज्ञों की मौत ने भी इस नेटवर्क को चलाएमान रखने की चुनौतियां खड़ी कर रखी हैं।

इससे पहले इस्राईल और अधिग्रहित फिलिस्तीन में रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष जैक्स डोमेन ने कहा था कि गाज़ा पट्टी में लाखो लोगों के पास इस समय पानी नहीं है। संभव है कि कुछ दिनों बाद ही गाज़ा पट्टी के सभी लोग पानी की कमी से जूझ रहे हों। क्योंकि हाल की हिंसा के कारण बिजली और पानी के नेटवर्क को भी नुकसान पहुँचा है। और अगर इस स्थिति को रोका नहीं गया तो नेकबंदी में घिरे यह लोग बहुत जल्द जल संकट को देखेंगे।

संयुक्त राष्ट्र की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार गाज़ा पट्टी 2020 तक रहने लायक नहीं रह जाएगा, और उसकी धरती के नीचे मौजूद पानी भी 2016 के बाद प्रयोग किए जाने लायक नहीं होगा। अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार गाज़ा के नीचे मौजूद पानी का लगभाग 96.5 प्रतिशत प्रयोग किए जाने लायक नहीं है।

अब इस्राईल द्वारा ईरान की सहायता के दावे से ऐसा प्रतीत होता है कि यह शासन जनता की राय को बदलने और अपने ऊपर पड़ने वाले दबावों को कम करने के लिए ऐसा कर रहा है।

क्योंकि ज़ायोनी सेना ने पिछले कुछ सप्ताह में हज़ारों फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी करके सैकड़ों को शहीद और हज़ारों को घायल कर दिया है, जिसके कारण उसको विश्व स्तर पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, और ऐसा प्रतीत होता है कि इस प्रकार के मुद्दे उठाकर नेतन्याहू जनता के ध्यान को फिलिस्तीन के मुद्दे से हटाना चाह रहे हैं।