Home मिडिल ईस्ट ज़ायोनी शासन कब्ज़ा लेना चाहता है हरम-ए-इब्राहिमी की प्राचीन निशानी

ज़ायोनी शासन कब्ज़ा लेना चाहता है हरम-ए-इब्राहिमी की प्राचीन निशानी

“अलमिसक़ात” या पियाऊ अलख़लील शहर के हरम अल इब्राहिमी की पुरातत्व निशानियों में से एक है। 1994 में इस हरम पर क़ब्ज़ा किए जाने और वहा जनसंहार के बाद से सालों हो चुके हैं कि इस पियाऊ का पानी सूख चुका है और अब यह नमाज़ियों की ज़ियारत पर आने वाले यात्रियों की प्यास नहीं बुझाता है।

अलख़लीख़ वक़्फ़ बोर्ड के महानिदेशक कहते हैं: अलमिसक़ात हरम के खुले सहन के दक्षिण पश्चिम कोने में स्थित है जो मक़ाम हज़रत इब्राहीम और हज़रत याक़ूम के बीच में स्थित है और उसके अंत में अलख़ज़रा गुबंद देखा जा सकता है। यह पियाऊ नमाज़ियों की प्यास बुझाने के लिए चूना पत्थर से बनाया गया है।

उन्होंने आगे बतायाः यह निर्माण एक बोर्ड की तरह देखा जा सकता है जिस पर पाँच लकीकें खिंची हैं, इसका निर्माण करने वाला उस्मान नाम का एक व्यक्ति था जिसने 1691 में इसको बनाया था।

अबू अलहलावा ने इसकी पानी पहुँचाने की प्रणाली के बारे में बतायाः इसके लिए एक व्यक्ति को रखा जाता था जो निश्चित कुओं से पियाऊ तक पानी पहुँचाता था, यह कुएं मिट्टी के पाइपों से भरे जाते थे जो ऐनुल अरब, ऐनुल करना, ऐनुल क़शता के चश्मों से जुड़े होते थे।

अबू हलावा इस निर्माण को हरमे इब्राहीमी के पुरात्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हैं वह चेतावनी देते हुए कहते हैः ज़ायोनी अतिक्रमणकारी इसको यहूदी निशानी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, अब मुसलमान साल में केवल दस दिन इस मस्जिद में आते हैं और इस पियाऊ का प्रयोग करते हैं।