source: Daily Sabah

इस्तांबुल- तुर्की सल्तनत के अंतर्गत चलने वाली खिलाफत-ए-उस्मानिया ने दुनिया के सामने वो निजाम पेश किया जिसकी बुनियाद पर आज का टैक्स सिस्टम, न्यायिक प्रणाली टिकी हुई है. एक लम्बे समय तक दुनिया के मुसलमानों को एक ही झंडें के नीचे एक सल्तनत के रूप में नियंत्रण करनी वाली खिलाफत-ए-उस्मानिया अपने ज़माने में सबसे सशक्त निजाम माना जाता था. यह सिस्टम इतना अधिक पावरफुल था की टैक्स देने वाले हर एक नागरिक का लिखित रिकॉर्ड रखा जाता था.

आइये जानते है की उस्मानिया सल्तनत में टैक्स और जनसँख्या के आंकड़ों को किस तरह मेंटेन किया जाता था तथा उनका रखरखाव की ज़िम्मेदारी किन लोगो को दी जाती थी.

कैडमस्टल रिकॉर्ड सिस्टम

खिलाफत-ए-उस्मानिया ने समय-समय पर कुछ सांख्यिकीय आंकड़ों को अपने प्रदेशों के साथ-साथ टैक्स, जमीन के स्वामित्व और बचत के तरीके का निर्धारण करने के तरीकें शामिल है. इन्हें “तहरीर” कहा जाता था, जिसका अर्थ कैडस्ट्रल रिकॉर्ड था. खिलाफ़त के संगठन में इन अभिलेखों की बहुत बड़ी भूमिका थी.

इस प्रणाली को तैयार करने में कुछ प्रशासनिक, वित्तीय और सैन्य आवश्यकतातों का सहयोग लिया गया. कई सालों तक इसे इस्तेमाल किया गया. खिलाफत ने अपने खर्चों को खजाने से नकद में कुछ सैनिकों और अधिकारियों के वेतन के रूप में भुगतान करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा, क्योंकि इस दौर की शर्तों के आधार पर कर संग्रह और हस्तांतरण मुश्किल था. सैनिकों और धर्मगुरु ने उन जगहों पर एकत्र किए गए करों से अपना वेतन प्राप्त किया. जिनके लिए सुल्तान ने उन्हें चार्टर दिया था. इस प्रणाली को “तिमर” कहा जाता था.

हर 30 साल की जनगणना

सेल्जुक, इल्खानिदस और ममलुकस इसी तरह के कैडमस्टल रिकॉर्ड यानी तहरीर रखते थे. इस प्रणाली का इस्तेमाल कई जगहों जैसे रोमन साम्राज्य, सैज़न इंग्लैंड और प्राचीन मिस्र में किया जाता था. हालांकि, अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में तुर्क प्रणाली एक बहुत ही सफल उदाहरण था. खिलाफत-ए-उस्मानिया में, यह व्यवस्था सुल्तान मुराद I (1362-138 9) के दौर से चली आ रही है, लेकिन पहली उपलब्ध किताब “अर्वानिद ” है . अल्बानिया की किताब 1431 से, यह किताब सुल्तान मुराद द्वितीय (1421-1451) के दौर की थी. यह किताब हॉलिल इनल्सिक ने प्रकाशित की थी. जो कि उस्मानिया इतिहास के एक महत्वपूर्ण शख्स थे. यह एक कानून था जो हर 30 साल से 40 साल के बीच में ‘तहरीर’ सर्वेक्षण किया जाना चाहिए.

करदाताओं की सही जनगणना

जब तहरीर रिकॉर्ड को संकलित करना शुरू किया गया था, तो एक विश्वसनीय शख्स को इस काम के किये जिम्मेदारी सौपी जाती थी. जिसे “अमीन” कहा जाता था. अमीन का काम बहुत अहम था, इसलिए वरिष्ठ नागरिक नौकर जैसे न्यायाधीश, प्रोफेसरों को यह पद दिया जाता था.

1430 में इस्तांबुल की आबादी

ऐतिहासिक आबादी के बारे में डेटा तुर्कस्टैट और तुर्की धार्मिक फाउंडेशन (टीडीवी) इस्लामिक इनसाइक्लोपीडिया द्वारा प्रकाशित किताब “द पॉपुलेशन ऑफ द ओटोमन एम्पायर एंड तुर्की” में पाया जा सकता है.

खिलाफ़त-ए-उस्मानिया से पहले, इस्तांबुल 1204 में चौथे क्रूसेड के दौरान बर्खास्त किए जाने के बाद जनसंख्या में भारी गिरावट आई. शहर को अपने क़ीमती सामानों को त्यागना पड़ा था.

1430 में इस्तांबुल की आबादी 40,000 या 50,000 के बीच थी. मेहमेद द्वितीय, जिसे मेहमेद उस वक़्त का माना जाता था. उन्होंने शहर पर कब्ज़ा कर लिया और शहर का पुनर्निर्माण करते वहां लोगों को बताया गया. इस्तांबुल की 1477 में 97,956 की आबादी थी.

शहर की आबादी 1520 में 400,000 तक और 17 वीं सदी के आखिर 700,000 तक पहुंच गई थी. यह 1885 में 873,575 और 1914  में 909, 978 थी. 1914 में, आबादी में 62 प्रतिशत मुस्लिम थे और सिर्फ 38 प्रतिशत गैर-मुस्लिम थे.

रिपब्लिकन दौर के दौरान, शहर की आबादी में कमी आई जब अंकारा राजधानी बनाया गया.  यह 1927 में 69,857 और 1935 में 741,118 आबादी थी. 1950 में 1 मिलियन, 1970 में 2 मिलियन, 1985 में 5 मिलियन और 2018 में 15 मिलियन है.

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