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शोधकर्ताओं ने खोज निकाला दुनिया का आठवाँ अजूबा, जल्दी ही उजागर होगा दुनिया के सामने

सभी जानते हैं कि दुनिया में 7 अजूबे हैं. इनमें से एक अजूबा ताज महल की शक्ल में खुद भारत के पास है. इन 7 अजूबों के बारे में तो सबको ही पता है, लेकिन इस दुनिया में एक 8वां अजूबा भी है. वैसे तो किसी भी आश्चयर्जनक चीज को आठवाँ अजूबा ही कह दिया जाता है लेकिन कई सालों की कोशिश के बाद आखिरकार शोधकर्ताओं ने दुनिया के 8वें आश्चर्य का ठिकाना मालूम करने में कामयाबी हासिल कर ली है. यह जगह बहुत पहले खो गई थी. अब शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस लापता हो चुके 8वें आश्चर्य को वे बहुत जल्द दुनिया के सामने ले आएंगे.

न्यू जीलैंड के उत्तरी द्वीप पर स्थित रोटोमेहाना झील की गुलाबी और सफेद सीढ़ियां 19वीं सदी में पर्यटकों के बीच बड़ा आकर्षण थीं. लोग दूर-दूर से उन्हें यहां देखने आया करते थे. ये सीढ़ीनुमा आकृतियां प्राकृतिक थीं. माना जाता था कि ये सीढ़ियां धरती पर सिलिका (एक किस्म का पत्थर) और धातु की तलछट (सिंटर) का सबसे बड़ा भंडार हैं. 1886 में यहां एक ज्वालामुखी विस्फोट हुआ जिसके बाद ये सीढियाँ किसी को नहीं दिखीं. लोगों को लगा कि ये सीढ़ियां इसी विस्फोट में बर्बाद हो गईं. किसी भी सरकारी सर्वे में इसे दर्ज नहीं किया गया. यह भी पता नहीं था कि ये सीढ़ियां किस अक्षांश या देशांतर रेखा पर स्थित हैं. इसलिए इनका पता लगाना बेहद मुश्किल था.

साल 2010 में इस मामले में एक दिलचस्प मोड़ आया. स्विट्जरलैंड के एक संग्रह में एक भूविज्ञानी की कई ऐसी डायरियां मिलीं, जो बहुत पहले खो गई थीं. इस डायरी की मदद से शोधकर्ताओं को रोटेमेहाना झील की विश्व-विख्यात सीढ़ियों के ठिकाने का अनुमान लगाने में सहायता मिली. इन सीढ़ियों को तलाश करने की मुहिम में जुटे एक शोधकर्ता रेक्स बन ने बताया कि पिछले 12 महीनों में करीब 2,500 घंटे का शोध किया गया है. उन्होंने कहा कि हमें यकीन है कि हमने इन सीढ़ियों की जगह का पता लगा लिया है. हमें भरोसा है कि पिछले 130 सालों से इन सीढ़ियों की खोज में जुटे किसी भी अन्य इंसान के मुकाबले हम इसे खोज निकालने के सबसे ज्यादा करीब हैं.

जिस डायरी की मदद से यह संभव हो पाया है, वह डायरी डॉक्टर सासचा नोल्डेन को स्विट्जरलैंड के बाल शहर में मिली थी. यह डायरी जाने-माने भूविज्ञानी डॉक्टर फरडिनेंड वोन हॉसटरर की थी. न्यू जीलैंड सरकार ने 1859 में डॉक्टर हॉस्टरर को अपने द्वीपों का सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंपी. उन्होंने रोटेमेहाना झील की इन सीढ़ियों को भी रेकॉर्ड किया. हालांकि 2,000 एकड़ इलाके में फैली इस झील का आधिकारिक तौर पर कभी सर्वे नहीं हुआ.

फिर 27 साल बाद इसी जगह के पास स्थित माउंट टराउरा ज्वालामुखी में विस्फोट होने के बाद इस पूरे इलाके का नक्शा बिल्कुल बदल गया. डॉक्टर हॉसटरर की डायरी मिलने के बाद शोधकर्ताओं ने कई भूवैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल से डायरी में दी गई जानकारियों की गणना की. शोधकर्ताओं का मानना है कि ज्वालामुखी विस्फोट के कारण रोटेमेहाना झील की सीढ़ियां राख से ढक गईं और ये सीढ़ियां झील के नजदीक की जमीन में सतह से करीब 10 मीटर की गहराई में स्थित हैं.

आमतौर पर यह माना जाता रहा है कि ज्वालामुखी विस्फोट के कारण दुनिया का 8वां अजूबा मानी जाने वाली ये सीढ़ियां नष्ट हो गईं. लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि ये सीढ़ियां अब भी सही-सलामत हैं. शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि इन्हें फिर से खोज निकाला जा सकता है. बन ने कहा कि पहले की तरह पूरे का पूरा तो शायद नहीं, लेकिन वे गुलाबी और सफेद सीढ़ियां एक हद तक फिर से लौटाई जा सकती हैं. जिस तरह 19वीं सदी में ये सीढ़ियां यहां आने वाले लोगों को हैरान करती थीं, वैसा दोबारा मुमकिन हो सकता है. शोधकर्ताओं ने बताया कि स्थानीय जनजाति भी इन सीढ़ियों को दोबारा खोज निकालने के प्रयास में साथ दे रही है. शोधकर्ता जल्द ही यहां की खुदाई शुरू करने जा रहे हैं.