Home स्पेशल रिपोर्ट 2075 तक वैश्विक आबादी में सबसे अधिक होंगे इस्लाम के अनुयायी

2075 तक वैश्विक आबादी में सबसे अधिक होंगे इस्लाम के अनुयायी

2075 तक इस्लाम दुनिया का सबसे बड़ा धर्म बन सकता है. जी हाँ, ये सच है, एक शोध के अनुसार साल 2075 तक इस्लाम पूरी दुनिया में सबसे अधिक माना जाने वाला धर्म होगा. इस शोध के अनुसार, मुस्लिमों की तेज़ी से बढती आबादी ईसाईयों की आबादी को पीछे छोड़ रही है. मुस्लिम धर्म में युवा पीढ़ी और नवजात शिशुओं की बढती संख्या को देख कर ये अनुमान लगाया गया है कि 2075 तक धरती पर सबसे अधिक अनुयायी इस्लाम धर्म के होंगे.

वर्तमान में ईसाई माताओं के मातृत्व दर सबसे अधिक है. ईसाई आबादी में शिशु जन्म दर सबसे अधिक है. वर्तमान में किसी अन्य धर्म की तुलना में ईसाई समुदाय में सबसे अधिक बच्चे जन्मे हैं. लेकिन अब इसमें बदलाव होते दिखाई दे रहे हैं. पिउ रिसर्च सेण्टर के अनुसार, ऐसा पहली बार होगा कि मुस्लिम समुदाय में मातृत्व दर बढ़ने से ईसाई समुदाय की जनसँख्या पीछे छूट जाएगी.

आंकड़ों के अनुसार, 2010 से 2015 के बीच ईसाई समुदाय में शिशु जन्म संख्या 223 मिलियन थी, जबकि इसी बीच 213 मिलियन मुस्लिम जन्म हुए. हालाँकि 2035 तक ये अंतर कम होने की उम्मीद है. अनुमानित तौर पर पांच वर्ष के अन्दर मुस्लिम समुदाय में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या 225 मिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है जबकि ईसाई समुदाय में जन्मने वाले बच्चों की संख्या 224 मिलियन तक सीमित हो जाएगी.

वैश्विक स्तर पर एक अनुमान के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय की उच्च प्रजनन दर और अपेक्षाकृत अधिक युवा जनसँख्या ईसाई समुदाय की तुलना में 2030 से 2035 तक मातृत्व दर में अपेक्षानुरूप अधिक वृद्धि लाएगी. वहीँ ईसाई समुदाय में मातृत्व दर कुछ सीमित हो जाएगी.

मुस्लिम जन्म में यह वृद्धि 2055 से 2060 के बीच तेज़ी से बढ़ेगी. इन पांच वर्षों में मुस्लिम माताओं से जन्म लेने वाले शिशुओं की संख्या 232 मिलियन तक जाएगी वहीँ ईसाई माताओं से जन्मने वाले शिशुओं की संख्या 226 मिलियन तक ही रहेगी.

2010 से 2060 तक वैश्विक जन्म दर का अनुमान लगाने वाले एक अनुसंधान के अनुसार, 2075 तक ईसाई समुदाय की तुलना में मुस्लिम समुदाय की जनसँख्या में अधिकाधिक वृद्धि होगी.

दिलचस्प बात ये है कि इस पूरी अवधि में 2070 में ईसाई और मुस्लिम समुदाय बराबरी के आंकड़ों के साथ खड़े होंगे. इस शोध के अनुसार, भले ही एक वक़्त में दोनों समुदाय बराबरी पर हों, पर जल्दी ही ईसाई समुदाय मुस्लिम आबादी से पिछड़ता नज़र आएगा.

ये अनुसन्धान 2500 सेन्सस, सर्वे और जनसँख्या रजिस्टरों पर अध्ययन करने के बाद किया गया है. पिउ रिसर्च सेण्टर द्वारा ये शोध ‘2015 दुनिया में धर्मों का भविष्य: जनसँख्या वृद्धि विकास अनुमान 2010- 2050’ के तहत किया गया है.  इस शोध के अनुसार, शताब्दी के अंत तक विश्व की 34.9 प्रतिशत आबादी मुस्लिम समुदाय की होगी. जबकि ईसाई समुदाय 33.8 प्रतिशत के साथ विश्व जनसँख्या में दूसरे स्थान पर होगा.