क्या इस्लाम के बारे में आप यह सच जानते हैं? देखे विडियो…

इस्लाम एक मज़हब जिसने हमेशा दूसरो की मदद करना, गरीबो की सहायता करना और क़ुरबानी देना सिखाया है. इस बात का फैसला आगे आने वाली कुछ पंक्तियों में आप खुद लेंगे.

इस्लामिक केलिन्डर उठा के अगर आप देखे तो आप देखेगे के इस्लामिक केलिन्डर का पहला महीना मुहर्रम-उल-हराम, जिस महीने में इमाम हुसैन अलह अस सलाम की शहादत हुई थी, क़ुरबानी से शुरू होता हैं. और साल का आखिरी महीना ज़िल-हिज्जा (जिसकों बकरा ईद के नाम से भी जाना जाता हैं), भी क़ुरबानी से ख़तम होता हैं.

इमाम हुसैन जोकि पैगम्बर-ऐ-इस्लाम मोहम्मद सल्लाहो अलह वसल्लम के नवासे है, कर्बला में अपने नाना के मज़हब को ज़िंदा रखने के लिए खुद को क़ुर्बान हो गए थे.

वही ज़िल हिज्जा की बात करे, इस्लाम के शुरुआती दौर में जब इब्राहीम अलह अस सलाम दुनिया में तशरीफ़ लाये थे तो अल्लाह ने उनसे ज़िब्ह-अज़ीम (ख़ुसूस क़ुरबानी) करने को कहा था.

तो अल्लाह के इस हुक्म का पालन करते हुए इब्राहीम अलह अस सलाम ने अपने बेटे इस्माइल अलह सलाम, जोकि तकरीबन 80 साल के बाद पैदा हुए थे, की क़ुरबानी देने का फैसला कर लिया था. और जिस वक़्त इब्राहीम अलह सलाम क़ुरबानी देने जा रहे थे उस वक़्त अल्लाह के हुक्म से वह पर एक दुम्बा आ जाता हैं और इस्माइल अलह सलाम की जगह पर दुम्बे की क़ुरबानी हो जाती हैं.

तो ज़रा सोचिए जब इस्लाम मज़हब का केलिन्डर क़ुरबानी से शुरू और क़ुरबानी से ख़तम हो रहा है तो वह धर्म कैसे किसी को नुक्सान पहुंच सकता हैं. इस्लाम मज़हब के मानने वाले हमेशा अपने को क़ुर्बान करते आये हैं.

आइये ऐसे ही इस्लाम के बारे में कुछ सच बताते हैं.

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