Home विडियो क़ुरान की यह किरआत आपकी आँखें नम कर देगी

क़ुरान की यह किरआत आपकी आँखें नम कर देगी

वर्ल्ड न्यूज़ अरेबिया आज आपके लिए ऐसा विडियो लेकर आया है जो आपको कुछ देर के लिए इमोशनल कर सकता है. हम जानते है की हमारे नबी के एक सहाबी थे जिनका नाम हजरत बिलाल (र.) है. हजरत बिलाल (र.) हब्शी गुलाम थे जिनके दिल में इस्लाम की ऐसी मुहब्बत पैदा हो गयी की उनके जुबान से कलमे के अलावा दूसरा शब्द ना निकलता था. उन्हें तरह तरह की यातनाएं दी दी जाती थी मार-पिटाई की जाती थी की इस्लाम के रास्ते से हट जाएँ, गर्म रेत पर भरी दोपहरी में लिटाया जाता था लेकीन हजरत बिलाल(र.) को सच्चाई के रास्ते से जरा भी ना डिगा पाए. पहली अज़ान देने का शरफ हजरत(बिलाल) को हासिल है. कहा जाता है जब तक वो फज्र की अज़ान नही देते थे तब तक सूरज नही निकलता था. “अर्श वाले भी सुनते थे जिसको, वो अजां थी अज़ान-इ-बिलाली”.

यह तो बात रही नबी के सहाबियों की, मुहम्मद के गुलामों की .. एक बार का वाकया है नमाज़ का वक़्त हो गया था लेकिन हजरत अली(र.) अभी तक मस्जिद में तशरीफ़ नही लाये थे काफी देर हो गयी तो दूर से आते हजरत अली(र.) दिखाई दिए, नमाज़ खड़ी हुई, नमाज़ के बाद हुज़ूर ने अली(र.) से पूछा देर क्यों हो गयी थी. हजरत अली ने बताया की एक शख्स रास्ते में आ गया था, मैं बचकर निकलता तो वो भी उसी रास्ते पर आ जाता, मैं दाई या बायीं तरफ से निकलता वो भी मेरा रास्ता रोकने के लिए उसी तरफ आ जाता. इसी हेरफेर में देर हो गयी.

तभी थोड़ी देर बाद वहां वही शख्स भी आ पहुंचा और नबी-ए-अकरम (स.अ.व्.) से फ़रियाद की के मुझे कलमा पढ़वाकर मुसलमान कर लीजिये. उसे कलमा पढ़वाया गया और इस्लाम में दाखिल हो गया. जब उससे पुछा गया की ऐसा क्या था? जिसने तुम्हे इस्लमा क़ुबूल करने पर मजबूर कर दिया.

तो उस अजनबी ने बताया की “मैं यहूदी था और मैंने अपनी धार्मिक किताबों में पढ़ा था की जो भी आखिरी नबी होगा उसकी एक ख़ास बात यह भी होगी की उसे कभी गुस्सा नही आएगा, हमेशा उसके चेहरे पर मुस्कराहट रहेगी, वो किसी भी बात से चिडचिडा नही जायेगा“, यह पढने के बाद मेरे दिल में ख्याल आया की क्यों ना मुहम्मद का निरिक्षण किया जाये.वो भी खुद को आखिरी नबी कहते हैं. तब मैं आपको चेक करने के लिए निकल पड़ा ,लेकिन मेरे दिल में ख्याल आया की मुहम्मद को चेक करने से पहले क्यों ना उनके मानने वालो को चेक किया जाए, जैसा मालिक होगा उसके गुलाम भी वैसे ही होंगे”

तभी दूर से हजरत अली (र.) आते हुए दिखाई दिए. फिर मैंने इनका रास्ता रोककर इन्हें गुस्सा दिलाने की पूरी कोशिश की, ये मुझसे बचकर निकलने की कोशिश करते तो मैं फिर इनके सामने आ जाता, यह दायें से निकलते तो मैं दायें तरफ आ जाता यह बायीं तरफ से निकलते तो मैं भी बायीं तरफ आ जाता लेकिन इनके चेहरे पर शिकन तक नही आई , यह मुस्कुराते हुए बचकर निकलने की कोशिश करते ( ध्यान रहे की मस्जिद में नमाज़ का वक़्त निकला जा रहा था). यहाँ तक की बहुत देर हो गयी तो मैंने अपनी हरकत बंद नही की लेकिन मैं यह देखकर ताज्जुब में रह गया की इनके चेहरे से मुस्कुराहट खत्म नही हुई, तब मैंने कहा की जिसके मानने वालो तक को गुस्सा नही आता तो उनका नबी कितना नर्म दिल होगा. बस यही जानकार मैंने इस्लाम क़ुबूल कर लिया.

यह तो बात रही आका के गुलामों की आइये विडियो में देखते है की बिलाल गुलामों के गुलामों की आवाज़ों में भी इतना दर्द बाकि है की कुरान की किरात सुनकर आखों में आंसू आ जाएँ.